लंबे समय से माना जाता रहा है कि अमेरिका, India को चीन के मुकाबले एक अहम रणनीतिक साझेदार के रूप में देखता है, लेकिन अब कुछ विश्लेषकों का कहना है कि यह धारणा बदल सकती है। उनका मानना है कि वॉशिंगटन अब बीजिंग के साथ प्रतिस्पर्धा को नए तरीके से परिभाषित कर रहा है और भारत को सीधे “चीन विकल्प” के रूप में देखने की नीति में बदलाव संभव है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, अमेरिका ने अतीत में चीन के साथ आर्थिक सहयोग बढ़ाकर उसे मजबूत होने का मौका दिया, जिसका नतीजा बाद में एक बड़े रणनीतिक प्रतिद्वंद्वी के रूप में सामने आया। इसी अनुभव के चलते अब यह चर्चा है कि अमेरिका भविष्य में भारत के साथ उसी तरह की रणनीतिक निर्भरता या मॉडल को दोहराने से बच सकता है।
इस बीच, ट्रंप के चीन नेतृत्व के प्रति नरम रुख और उनकी बयानबाजी को लेकर वैश्विक कूटनीतिक हलकों में अलग-अलग राय सामने आ रही है। कुछ इसे रणनीतिक बदलाव मान रहे हैं, तो कुछ इसे राजनीतिक संदेश या व्यक्तिगत कूटनीतिक शैली बता रहे हैं।
भारत के लिए विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते वैश्विक समीकरणों में उसे संतुलित और बहुस्तरीय विदेश नीति पर ध्यान देना होगा। अमेरिका के साथ मजबूत संबंध बनाए रखते हुए भारत को अन्य वैश्विक और क्षेत्रीय साझेदारियों को भी विस्तार देना जरूरी है, ताकि किसी एक शक्ति पर अत्यधिक निर्भरता न रहे।
