लखनऊ में 60 दिन का अलर्ट: प्रशासन का बड़ा फैसला
लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट क्षेत्र में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत यह निषेधाज्ञा लागू की गई है। संयुक्त पुलिस आयुक्त (कानून एवं व्यवस्था) बबलू कुमार द्वारा जारी आदेश में साफ कहा गया है कि किसी भी तरह की भीड़, जुलूस या धरना-प्रदर्शन अब बिना अनुमति संभव नहीं होगा। शहर में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस को सख्त निगरानी के निर्देश दिए गए हैं।
5 से अधिक लोगों की सभा पर रोक, अनुमति जरूरी
आदेश के अनुसार, बिना अनुमति पांच या उससे अधिक लोगों का एकत्र होना, समूह बनाना, जुलूस निकालना या किसी प्रकार का सार्वजनिक आयोजन करना प्रतिबंधित रहेगा। धार्मिक कार्यक्रमों जैसे भंडारा, मजलिस, जुलूस, चल समारोह या सांस्कृतिक आयोजन के लिए पहले से प्रशासनिक अनुमति लेना अनिवार्य होगा। रात 12 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर के उपयोग पर भी पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है।
संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष प्रतिबंध
निषेधाज्ञा के तहत विधानसभा भवन और उसके आसपास के क्षेत्रों में ट्रैक्टर-ट्रॉली, घोड़ा गाड़ी, ज्वलनशील पदार्थ और हथियार लेकर प्रवेश पर रोक रहेगी। इसके अलावा लालबत्ती चौराहा, पार्क रोड, सिविल अस्पताल, अटल चौक, बंदरिया बाग, गोल्फ क्लब और कैसरबाग जैसे इलाकों में धरना या विरोध प्रदर्शन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। प्रशासन ने साफ किया है कि इन क्षेत्रों में किसी भी प्रकार की अव्यवस्था बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
ड्रोन, शूटिंग और सोशल मीडिया पर भी नजर
लखनऊ में सरकारी भवनों जैसे लोकभवन, मुख्यमंत्री आवास और विधान भवन के आसपास ड्रोन उड़ाने या शूटिंग करने पर भी रोक लगा दी गई है। साथ ही सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट, अफवाह या सांप्रदायिक तनाव फैलाने वाले कंटेंट पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। साइबर सेल को ऐसे मामलों पर लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।
डिलीवरी स्टाफ और किरायेदारों की जांच अनिवार्य
ऑनलाइन डिलीवरी सेवाओं जैसे जोमैटो, स्विगी और ब्लिंकिट के कर्मचारियों का पुलिस सत्यापन अनिवार्य कर दिया गया है। साइबर कैफे संचालकों को ग्राहकों का पूरा रिकॉर्ड रखने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं मकान मालिकों को भी बिना किरायेदार सत्यापन के मकान न देने की सख्त हिदायत दी गई है।
सख्त संदेश: नियम तोड़ा तो होगी कार्रवाई
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आदेश का उल्लंघन करने वालों पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 के तहत कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का कहना है कि यह कदम शहर में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए जरूरी है।
