राज सिंह ने आरोप लगाया कि उन्हें एसओजी टीम ने बिना ठोस सबूत के अयोध्या से उठाया था और जबरन दबाव बनाया गया कि वह अपराध स्वीकार करें। उनके मुताबिक, पूछताछ के दौरान उन पर लगातार दबाव बनाया गया और धमकियां दी गईं कि “सच नहीं बताया तो एनकाउंटर कर दिया जाएगा।”
उन्होंने बताया कि उनकी गिरफ्तारी के बाद परिवार ने लगातार उनके निर्दोष होने के सबूत पेश किए, जिनमें घर के सीसीटीवी फुटेज भी शामिल थे, जिससे यह साबित हुआ कि घटना के समय वह अपने घर पर मौजूद थे। इसके बाद मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई और जांच में सामने आया कि असली आरोपी कोई और है।
सीबीआई जांच में खुलासा होने के बाद राज सिंह को रिहा कर दिया गया, जबकि असली आरोपी राजकुमार सिंह उर्फ राज को बाद में मुजफ्फरनगर से गिरफ्तार किया गया।
रिहाई के बाद मीडिया से बातचीत में राज सिंह ने कहा कि अगर जांच एजेंसी बदलकर सीबीआई को नहीं सौंपी जाती, तो शायद सच सामने नहीं आ पाता और वह आज जिंदा नहीं होते। उन्होंने सीबीआई अधिकारियों का आभार जताया कि उन्होंने निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाई।
राज सिंह बलिया के आनंद नगर मोहल्ले के रहने वाले हैं और स्थानीय स्तर पर सक्रिय राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियों से भी जुड़े बताए जाते हैं। इससे पहले उन पर एक अंडा व्यवसायी की हत्या के मामले में भी आरोप लग चुका है, जिसमें वे फिलहाल जमानत पर बाहर हैं।
इस पूरे मामले ने पुलिस की शुरुआती जांच और एसओजी की कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
