नई दिल्ली । चित्रकूट स्थित जगदगुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय का 26वां स्थापना दिवस उत्साह और गरिमामय वातावरण में मनाया गया। इस अवसर पर आयोजित समारोह में शिक्षा, शोध, संस्कृति और दिव्यांगजन सशक्तिकरण से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित समारोह में शिक्षकों, विद्यार्थियों, अधिकारियों और अतिथियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष बना दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों के स्वागत के साथ हुई। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से स्थापना दिवस की गतिविधियों का विवरण प्रस्तुत किया गया। इसके बाद विश्वविद्यालय की उपलब्धियों और विकास यात्रा पर आधारित विशेष डॉक्यूमेंट्री का प्रदर्शन किया गया, जिसमें संस्थान की शैक्षणिक, शोध एवं सामाजिक गतिविधियों को विस्तार से प्रस्तुत किया गया। उपस्थित लोगों ने विश्वविद्यालय की अब तक की प्रगति और भविष्य की योजनाओं को भी देखा।
समारोह के मुख्य अतिथि तुलसी पीठ के उत्तराधिकारी आचार्य रामचंद्र दास ने अपने संबोधन में कहा कि जगदगुरु स्वामी रामभद्राचार्य की संकल्पना पर स्थापित यह विश्वविद्यालय अपनी विशिष्ट पहचान के कारण विश्व में अलग स्थान रखता है। उन्होंने कहा कि यह संस्थान केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि सेवा, संस्कार और समर्पण की भावना को आगे बढ़ाने वाला एक महत्वपूर्ण मंच है। उन्होंने विद्यार्थियों और शिक्षकों से अध्ययन, अनुसंधान और सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति पूरी निष्ठा के साथ कार्य करने का आह्वान किया।
आचार्य रामचंद्र दास ने विश्वविद्यालय परिवार को स्थापना दिवस की शुभकामनाएं देते हुए विश्वास जताया कि जगदगुरु स्वामी रामभद्राचार्य के मार्गदर्शन और आशीर्वाद से यह संस्थान आने वाले समय में शिक्षा और शोध के क्षेत्र में नए मानक स्थापित करेगा। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि समाज के लिए जिम्मेदार और संवेदनशील नागरिक तैयार करना भी है।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. शिशिर कुमार पांडेय ने कहा कि संस्थान शैक्षणिक उत्कृष्टता और शोध गतिविधियों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने बताया कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, नवाचार और अनुसंधान के माध्यम से विश्वविद्यालय अपने उद्देश्यों को आगे बढ़ा रहा है और भविष्य में भी विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को प्राथमिकता दी जाएगी।
स्थापना दिवस समारोह में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। संगीत विभाग के कलाकारों ने पारंपरिक सोहर और बधाई गीत प्रस्तुत कर कार्यक्रम को सांस्कृतिक रंग प्रदान किया। इसके बाद प्रबंधन विभाग की छात्राओं ने विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से दर्शकों का उत्साह बढ़ाया। प्रसिद्ध कलाकार अनुपमा त्रिपाठी ने कत्थक नृत्य की प्रस्तुति देकर कार्यक्रम में भारतीय शास्त्रीय कला की छटा बिखेरी। उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन ने उन्हें प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।
इस अवसर पर जुलाई माह में आयोजित कत्थक कार्यशाला के प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र भी वितरित किए गए। साथ ही संत कबीर अकादमी संस्कृत विभाग, उत्तर प्रदेश के सहयोग से निर्गुण कबीर गायन कार्यशाला का शुभारंभ किया गया, जिससे भारतीय सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपराओं के संरक्षण को नई गति मिलने की उम्मीद व्यक्त की गई। समारोह में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन शिक्षा, शोध और सांस्कृतिक मूल्यों को आगे बढ़ाने के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।
