प्रशासन ने संबंधित पक्षों को अपनी-अपनी दावेदारी, साक्ष्य और दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा है, ताकि मामले की निष्पक्ष सुनवाई के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जा सके। हालांकि, विवाद में घरौनी में संशोधन की मांग को लेकर प्रशासन के सामने कानूनी पेच भी खड़ा हो गया है। प्रदेश स्तर पर राजस्व परिषद ने फिलहाल घरौनियों में किसी भी तरह के संशोधन पर रोक लगा रखी है।
छह पोतियों ने डीएम से की थी शिकायत
बाबा नीब करौरी यानी लक्ष्मी नारायण शर्मा के छोटे पुत्र स्वर्गीय धर्म नारायण शर्मा की छह पुत्रियों सुनीता, अर्चना, वंदना, भावना, रितु और रिचा ने अगस्त में कलेक्ट्रेट पहुंचकर डीएम को प्रार्थना पत्र दिया था।
शिकायत में आरोप लगाया गया कि ग्राम पंचायत नगला स्थित मकान संख्या 154-व, जिसमें बाबा का ध्यान कक्ष, भोजनालय और शयन कक्ष शामिल हैं, पर श्री ठाकुर हनुमानजी ट्रस्ट के ट्रस्टी संजय गुप्ता ने एकाधिकार कर लिया है।
मुंबई से आए शिकायतकर्ता पक्ष की ओर से भावना रावत के पति मनोज रावत ने भी डीएम से मुलाकात की थी। उन्होंने पैतृक संपत्ति को कब्जामुक्त कराने और विवाद के स्थायी समाधान के लिए डीएम की अध्यक्षता में शासकीय प्रशासनिक ट्रस्ट बनाने की मांग रखी थी।
ट्रस्ट ने आरोपों को किया खारिज
श्री ठाकुर हनुमान जी ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष मनोज अग्रवाल ने ट्रस्ट पर लगाए गए सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि ट्रस्ट का गठन वर्ष 1996 में बाबा की धर्मपत्नी स्वर्गीय रामबेटी शर्मा ने कराया था।
मनोज अग्रवाल के मुताबिक, वर्तमान में ट्रस्ट में 18 सदस्य हैं और बाबा की आगरा निवासी बेटी गिरजा भटेले स्वयं इसकी अध्यक्ष हैं। इसके अलावा बाबा के बड़े बेटे स्वर्गीय अनेक सिंह शर्मा की बड़ी बेटी सुनीता शर्मा के पति त्रिलोकी चंद्र शर्मा, दूसरी बेटी अर्चना शर्मा और बेटे डॉ. धनंजय शर्मा भी ट्रस्ट के सदस्य हैं।
उन्होंने कहा कि ट्रस्ट के सभी सदस्य सेवा भावना से काम कर रहे हैं और संपत्ति का कोई निजी उपयोग नहीं हो रहा है। उनका कहना है कि जो भी व्यक्ति निष्पक्ष भाव से सेवा करना चाहता है, उसका स्वागत है।
शिकायतकर्ता पक्ष बोला- ट्रस्ट पर किसी का एकाधिकार नहीं होना चाहिए
शिकायतकर्ता पोतियों में शामिल भावना रावत के पति मनोज रावत का कहना है कि उनका उद्देश्य ट्रस्ट पर किसी एक व्यक्ति के एकाधिकार को रोकना है। उन्होंने कहा कि इसी वजह से प्रशासन के सामने डीएम की अध्यक्षता वाली प्रशासनिक समिति बनाने का प्रस्ताव रखा गया है। उनका कहना है कि इससे बाबा की संपत्ति का दुरुपयोग रोकने और उसकी बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
घरौनी संशोधन पर रोक ने बढ़ाई प्रशासन की मुश्किल
प्रशासन ने विवाद की जांच शुरू कर दी है, लेकिन घरौनी में संशोधन की मांग के कारण मामले में कानूनी अड़चन सामने आ गई है। शिकायतकर्ता पक्ष ने घरौनी में संशोधन की मांग की है, जबकि प्रदेश स्तर पर बोर्ड ऑफ रेवेन्यू यानी राजस्व परिषद ने फिलहाल घरौनियों में किसी भी तरह के संशोधन पर रोक लगा रखी है।
ऐसे में राजस्व नियमों की इस बंदिश के बीच जिला प्रशासन स्वामित्व विवाद का क्या कानूनी रास्ता निकालता है, इस पर निगाहें टिकी हैं। फिलहाल प्रशासन ने दोनों पक्षों से दस्तावेज और साक्ष्य मांगे हैं।
जन्मस्थली को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की तैयारी
इधर, बाबा नीब करौरी की जन्मस्थली अकबरपुर को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने के लिए जिला प्रशासन विकास कार्यों को गति दे रहा है। डीएम संतोष कुमार शर्मा ने जन्मस्थली पहुंचकर विकास कार्यों और प्रस्तावित कॉरिडोर की समीक्षा की।
डीएम के मुताबिक, उत्तर प्रदेश सरकार ने पर्यटन नीति-2022 में संशोधन कर नीब करौरी बाबा सर्किट को शामिल किया है। इसके तहत लखनऊ, फर्रुखाबाद, फिरोजाबाद और मथुरा/वृंदावन को आपस में जोड़ा जा रहा है। इससे देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को सुविधाएं मिलने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और निवेश के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
पहले चरण में 865.98 लाख के काम
कॉरिडोर विकास के फेज-1 में 865.98 लाख रुपए की लागत से डॉरमेट्री, रेस्तरां, सभा स्थल, डिजिटल लाइब्रेरी, सीसी रोड, सेप्टिक टैंक, समरसेबुल पंप और साइट डेवलपमेंट के काम चल रहे हैं।
वहीं फेज-2 में 222.47 लाख रुपए की लागत से टॉयलेट ब्लॉक, गार्ड रूम, सीसी रोड, नाली, पेवर, ट्यूबवेल, बाह्य विद्युत कार्य और म्यूरल वर्क स्वीकृत किए गए हैं।
भूमि अधिग्रहण के बाद यहां भव्य प्रवेश द्वार, पर्यटन सुविधा केंद्र, ध्यान एवं वेलनेस सेंटर, फूड कोर्ट, म्यूजियम, ओपन एयर थिएटर, पार्किंग और प्रसाद मंडप जैसी सुविधाएं विकसित करने की योजना है।
अब जन्मस्थली के स्वामित्व विवाद में प्रशासन की जांच और दोनों पक्षों की ओर से प्रस्तुत किए जाने वाले दस्तावेज अहम होंगे। इन्हीं के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की दिशा तय होगी।
