फाइनल में हारने के बावजूद अर्जेंटीना भी खाली हाथ नहीं लौटा। उपविजेता टीम को 33 मिलियन डॉलर यानी लगभग 318 करोड़ रुपए की इनामी राशि मिली। वहीं तीसरे स्थान पर रहने वाली इंग्लैंड को 29 मिलियन डॉलर यानी करीब 279 करोड़ रुपए और चौथे स्थान पर रही फ्रांस को 27 मिलियन डॉलर यानी लगभग 260 करोड़ रुपए दिए गए। क्वार्टर फाइनल तक पहुंचने वाली प्रत्येक टीम को 19 मिलियन डॉलर जबकि प्री क्वार्टर फाइनल यानी राउंड ऑफ 16 में बाहर होने वाली टीमों को 15 मिलियन डॉलर की पुरस्कार राशि दी गई।
फाइनल मुकाबला बेहद रोमांचक रहा। निर्धारित 90 मिनट तक दोनों टीमें कोई गोल नहीं कर सकीं और मुकाबला अतिरिक्त समय में पहुंच गया। मैच का फैसला 106वें मिनट में हुआ जब स्पेन के स्टार खिलाड़ी फेरान टोरेस ने शानदार गोल दागकर अपनी टीम को 1-0 की बढ़त दिलाई। यही गोल निर्णायक साबित हुआ और स्पेन ने 16 वर्षों बाद एक बार फिर विश्व कप ट्रॉफी अपने नाम कर ली। इससे पहले स्पेन ने वर्ष 2010 में पहली बार फुटबॉल विश्व कप का खिताब जीता था।
पूरे टूर्नामेंट में स्पेन का प्रदर्शन संतुलित और अनुशासित रहा। टीम की मजबूत रक्षापंक्ति उसकी सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी। स्पेन ने पूरे विश्व कप अभियान में केवल एक गोल खाया जो उसकी शानदार डिफेंसिव रणनीति का प्रमाण है। आक्रमण और रक्षा के बेहतरीन तालमेल ने टीम को लगातार जीत दिलाई और आखिरकार विश्व विजेता बना दिया।
स्पेन की सफलता में मिडफील्डर रोड्री की भूमिका भी बेहद अहम रही। पूरे टूर्नामेंट में उनके शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें प्रतियोगिता का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुना गया और प्रतिष्ठित गोल्डन बॉल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। रोड्री ने अपनी सूझबूझ शानदार पासिंग और खेल पर नियंत्रण की क्षमता से स्पेन के अभियान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।
विश्व कप 2026 का समापन स्पेन की ऐतिहासिक जीत के साथ हुआ जिसने एक बार फिर साबित कर दिया कि मजबूत टीम वर्क अनुशासित खेल और प्रभावी रणनीति किसी भी बड़े टूर्नामेंट में सफलता की सबसे बड़ी कुंजी होती है।
