अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना करीब 4,434 डॉलर प्रति औंस और चांदी लगभग 66.95 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही थी। दोनों धातुओं पर मौजूदा आर्थिक संकेतों का प्रभाव पड़ रहा है, लेकिन उनकी कीमत और वैल्यूएशन की स्थिति एक जैसी नहीं है।
सोने की मॉडल्ड फेयर वैल्यू 3,248 से 4,595 डॉलर प्रति औंस के बीच बताई गई है। इसका मिडपॉइंट 3,922 डॉलर प्रति औंस है। अगस्त की शुरुआत में सोना करीब 4,242 डॉलर प्रति औंस पर था, जो अनुमानित मिडपॉइंट से करीब 8 प्रतिशत अधिक था। जनवरी में सोना 5,589 डॉलर प्रति औंस के स्तर तक पहुंचा था, जो मॉडल्ड रेंज से काफी ऊपर था।
इसके बाद जून में सोने की कीमत लगभग 3,985 डॉलर प्रति औंस तक आई, जो अनुमानित फेयर वैल्यू के करीब थी। बाद में सोने में फिर तेजी देखने को मिली। इसका मतलब यह है कि पहले की तेज सट्टेबाजी कुछ कम हुई है, लेकिन सोना अभी भी मॉडल्ड मिडपॉइंट से ऊपर कारोबार कर रहा है।
चांदी के मामले में तस्वीर कुछ अलग है। इसकी वैल्यूएशन को गोल्ड-सिल्वर रेशियो के आधार पर देखा जा रहा है। 60:1 के सामान्य रेशियो के अनुसार चांदी की अनुमानित कीमत 54 से 77 डॉलर प्रति औंस के बीच बनती है, जिसका मिडपॉइंट 65 डॉलर है। विश्लेषण के अनुसार चांदी करीब 61.7 डॉलर प्रति औंस पर थी, यानी मिडपॉइंट से लगभग 6 प्रतिशत नीचे।
गोल्ड-सिल्वर रेशियो भी चांदी की तुलनात्मक स्थिति को समझने में मदद करता है। जनवरी में यह अनुपात करीब 46 तक पहुंच गया था, जिसका मतलब था कि सोने की तुलना में चांदी महंगी हो गई थी। अब यह लगभग 69 पर पहुंच चुका है, जो 21वीं सदी के करीब 69:1 के औसत के आसपास है।
चांदी को केवल निवेश मांग से ही समर्थन नहीं मिलता। इसका इस्तेमाल औद्योगिक कार्यों में भी होता है। इसलिए इसकी कीमत पर निवेश मांग के साथ औद्योगिक मांग का भी प्रभाव पड़ता है। रुपये की कमजोरी भी घरेलू MCX सिल्वर के लिए समर्थन देने वाला कारक मानी जा रही है।
MCX सिल्वर के लिए 2.36 लाख रुपये प्रति किलो का स्तर सपोर्ट और 2.42 लाख रुपये प्रति किलो का स्तर रेजिस्टेंस बताया गया है। यदि चांदी रेजिस्टेंस के ऊपर टिकती है तो खरीदारी बढ़ने की संभावना बताई गई है।
अब बाजार की नजर अमेरिका के आने वाले महंगाई आंकड़ों पर है। PPI और CPI जैसे आंकड़े फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर बाजार की उम्मीदों को प्रभावित कर सकते हैं। सोने के लिए 4,300 से 4,500 डॉलर प्रति औंस और चांदी के लिए 65 से 67 डॉलर प्रति औंस के स्तर महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
भारतीय निवेशकों के लिए अंतरराष्ट्रीय कीमतों के साथ रुपये की चाल भी अहम है। अंतरराष्ट्रीय कीमत बढ़ने के साथ रुपया कमजोर होने पर घरेलू सोने-चांदी की कीमतों में तेजी अधिक दिख सकती है। वहीं अंतरराष्ट्रीय कीमतों में गिरावट की स्थिति में कमजोर रुपया घरेलू कीमतों में गिरावट को कुछ हद तक सीमित कर सकता है।
