सियासी हलकों में चर्चा है कि समाजवादी पार्टी उत्तर प्रदेश में आम आदमी पार्टी को विधानसभा चुनाव के लिए करीब 15 से 20 सीटें देने पर विचार कर सकती है। इस संभावना को सपा प्रमुख अखिलेश यादव और आप नेता संजय सिंह के बीच हुई मुलाकातों से भी जोड़कर देखा जा रहा है। दोनों नेताओं की मुलाकात के बाद यूपी की चुनावी रणनीति को लेकर अटकलें तेज हुई हैं।
संजय सिंह और अखिलेश यादव की इसी साल अप्रैल में मुलाकात हुई थी। इसके बाद 23 अगस्त को भी दोनों नेताओं के बीच मुलाकात हुई। सूत्रों के हवाले से यह दावा किया जा रहा है कि आम आदमी पार्टी उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव के लिए 15 से 20 सीटों की मांग कर सकती है। हालांकि, सीटों के बंटवारे को लेकर अभी अंतिम फैसला सामने नहीं आया है।
सपा और कांग्रेस के बीच संभावित गठबंधन के बीच आप को साथ लाने की कोशिश कांग्रेस के लिए आसान नहीं मानी जा रही है। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि 2027 में उत्तर प्रदेश के साथ पंजाब और गोवा में भी विधानसभा चुनाव होने हैं। पंजाब में आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच राजनीतिक प्रतिस्पर्धा पहले से मौजूद है। ऐसे में दोनों दलों को एक ही गठबंधन में लाने का फैसला कांग्रेस के लिए राजनीतिक रूप से संवेदनशील हो सकता है।
इसके अलावा आम आदमी पार्टी के INDIA गठबंधन से दूरी बनाने वाले बयानों ने भी स्थिति को जटिल बनाया है। 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद आप की उत्तर प्रदेश में प्रत्यक्ष चुनावी भूमिका नहीं रही थी। पार्टी ने यूपी में अपने उम्मीदवार नहीं उतारे थे और समाजवादी पार्टी को समर्थन दिया था।
2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने 349 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे। पार्टी को कुल 3 लाख 47 हजार 187 वोट मिले थे। हालांकि उसका प्रदर्शन व्यापक रूप से प्रभावी नहीं रहा, लेकिन कुछ विधानसभा क्षेत्रों में उसे अपेक्षाकृत अधिक मत मिले थे। रुधौली में आप उम्मीदवार को 24,367 और खलीलाबाद में 25,123 वोट मिले थे।
इसके अलावा लोनी, साहिबाबाद, नोएडा और मोहनलालगंज जैसे क्षेत्रों में भी पार्टी के उम्मीदवारों को पांच हजार से अधिक वोट मिले थे। यही कारण है कि आगामी चुनाव में आप इन क्षेत्रों को संभावित सीट दावेदारी के आधार के रूप में देख सकती है। यदि सपा इन क्षेत्रों में आप को जगह देती है तो सीट बंटवारे की प्रक्रिया में कांग्रेस की भूमिका और रणनीति महत्वपूर्ण हो जाएगी।
2024 के लोकसभा चुनाव में आप ने उत्तर प्रदेश से उम्मीदवार नहीं उतारे थे और सपा को समर्थन दिया था। चुनाव के दौरान अरविंद केजरीवाल ने लखनऊ में अखिलेश यादव के साथ प्रेस वार्ता भी की थी। वहीं दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान सपा ने कांग्रेस के बजाय आम आदमी पार्टी का समर्थन किया था।
ऐसे में उत्तर प्रदेश में सपा, कांग्रेस और आप के संभावित समीकरण को लेकर राजनीतिक नजरें टिकी हैं। यदि आप की गठबंधन में औपचारिक एंट्री होती है तो सीटों के बंटवारे के साथ-साथ तीनों दलों के बीच क्षेत्रीय प्रभाव और चुनावी रणनीति को लेकर भी बातचीत करनी होगी। फिलहाल सपा और आप के बीच संभावित तालमेल की चर्चा ने यूपी की विपक्षी राजनीति में नई हलचल जरूर पैदा कर दी है।
