नई दिल्ली ।तलाक के बाद पत्नी को मिलने वाले गुजारा भत्ते यानी एलिमनी को लेकर अक्सर यह सवाल उठता है कि अगर महिला दोबारा शादी कर ले तो क्या पहले पति को पहले की तरह आर्थिक सहायता देते रहना होगा। भारतीय कानून में इस स्थिति को लेकर अलग-अलग प्रावधान मौजूद हैं और दूसरी शादी के बाद पूर्व पति की जिम्मेदारी पर इसका सीधा प्रभाव पड़ सकता है।
सामान्य कानूनी स्थिति यह है कि तलाकशुदा महिला के दोबारा विवाह करने के बाद पहले पति से मिलने वाला नियमित गुजारा भत्ता जारी रहने का आधार खत्म हो सकता है। इसकी वजह यह है कि पुनर्विवाह के बाद महिला के भरण-पोषण की परिस्थितियां बदल जाती हैं। हालांकि, किसी मामले में अंतिम स्थिति संबंधित कानून, अदालत के आदेश और मामले की परिस्थितियों पर निर्भर करती है।
हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 25 स्थायी गुजारा भत्ता और भरण-पोषण से संबंधित प्रावधान देती है। इसके तहत अदालत परिस्थितियों में बदलाव होने पर पहले दिए गए आदेश में बदलाव कर सकती है। पत्नी के पुनर्विवाह को भी ऐसे महत्वपूर्ण बदलावों में माना जा सकता है, जिसके आधार पर पूर्व पति अदालत से एलिमनी के आदेश में संशोधन या उसे समाप्त करने की मांग कर सकता है।
इसका अर्थ यह नहीं है कि केवल दूसरी शादी की जानकारी सामने आते ही हर स्थिति में भुगतान अपने आप समाप्त मान लिया जाएगा। यदि पहले पति के पक्ष में कोई एलिमनी आदेश मौजूद है, तो उसके प्रभाव और उसे बदलने की प्रक्रिया को संबंधित न्यायालय के आदेश के अनुसार देखा जाता है। इसलिए किसी व्यक्ति को अपने स्तर पर भुगतान बंद करने के बजाय कानूनी प्रक्रिया अपनाना जरूरी हो सकता है।
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता यानी BNSS की धारा 144 भी पत्नी, बच्चों और माता-पिता के भरण-पोषण से संबंधित प्रावधान देती है। इस व्यवस्था में भी तलाकशुदा महिला के पुनर्विवाह की स्थिति महत्वपूर्ण होती है। हालांकि, किसी विशेष मामले में लागू कानूनी प्रावधान और न्यायालय के आदेश के आधार पर परिणाम अलग हो सकते हैं।
मुस्लिम तलाकशुदा महिलाओं के मामलों में भी पुनर्विवाह का पहले पति से मिलने वाले भरण-पोषण पर प्रभाव पड़ता है। हालांकि, व्यक्तिगत कानून और मामले की परिस्थितियों के कारण कानूनी स्थिति को हमेशा संबंधित प्रावधानों और न्यायिक आदेशों के संदर्भ में समझना चाहिए।
सबसे महत्वपूर्ण बात बच्चों के भरण-पोषण को लेकर है। यदि तलाकशुदा पत्नी ने दूसरी शादी कर ली है, लेकिन पहले पति से उसके बच्चे हैं, तो बच्चों की जिम्मेदारी केवल मां की दूसरी शादी के कारण खत्म नहीं होती। बच्चों के पालन-पोषण, शिक्षा और आवश्यक खर्चों की जिम्मेदारी उनके जैविक पिता पर बनी रह सकती है।
इसलिए पत्नी की दूसरी शादी और बच्चों के अधिकार को अलग-अलग कानूनी मुद्दों के रूप में देखा जाता है। पूर्व पत्नी को मिलने वाली एलिमनी पर पुनर्विवाह का प्रभाव पड़ सकता है, लेकिन बच्चों के भरण-पोषण का अधिकार स्वतंत्र विषय है।
एलिमनी से जुड़े मामलों में आय, आर्थिक स्थिति, अदालत का पूर्व आदेश, पुनर्विवाह की स्थिति और बच्चों की जिम्मेदारी जैसे कई तथ्य महत्वपूर्ण हो सकते हैं। इसलिए किसी भी मामले में केवल सामान्य नियम के आधार पर निष्कर्ष निकालने के बजाय संबंधित अदालत के आदेश और लागू कानून को देखना जरूरी है। यही वजह है कि एलिमनी बंद करने या बदलने से पहले कानूनी प्रक्रिया का पालन करना अधिक सुरक्षित माना जाता है।
