सर्जियो गोर के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की मुलाकात के बाद भारत की ओर से मीडिया को लेकर विशेष अनुरोध किया गया था। उनका दावा है कि विदेश मंत्रालय की तरफ से कहा गया था कि पत्रकारों को बैठक के बाद बुलाया जा सकता है, लेकिन पूरी प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं होनी चाहिए। साथ ही पत्रकारों को सवाल पूछने की अनुमति नहीं देने की बात भी कही गई थी।
गोर के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप ने इस व्यवस्था पर सहमति जताई थी। हालांकि, बैठक समाप्त होने के बाद ट्रंप ने कैमरे की ओर देखकर पत्रकारों से सवाल करने की बात कह दी। इसके बाद मीडिया बातचीत का स्वरूप पहले तय किए गए तरीके से अलग हो गया।
भारत की ओर से सामने आए सरकारी सूत्रों के मुताबिक, प्रतिनिधिमंडल ने किसी असामान्य स्थिति से बचने के लिए पहले से तैयारी की थी। सूत्रों का कहना है कि ट्रंप के साथ बैठकों के दौरान सावधानी बरतना जरूरी माना जाता है, क्योंकि वह बातचीत के दौरान अचानक कोई नया मुद्दा उठा सकते हैं या चर्चा का रुख बदल सकता है।
भारतीय पक्ष के अनुसार, ट्रंप के साथ पहले हुई कुछ बैठकों में भी बातचीत के दौरान अप्रत्याशित मुद्दे सामने आए हैं। दक्षिण अफ्रीका और यूक्रेन के नेताओं के साथ उनकी बातचीत के दौरान भी ऐसी स्थिति देखने को मिलने का हवाला दिया गया है। इसी कारण प्रधानमंत्री मोदी और ट्रंप की मुलाकात के दौरान मीडिया बातचीत को लेकर भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने पहले से तैयारी की थी।
जी-7 बैठक के दौरान मोदी और ट्रंप के बीच कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। इनमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, वहां मौजूद भारतीय नाविकों की सुरक्षा और भारत-अमेरिका के बीच व्यापार से जुड़े विषय प्रमुख रहे। होर्मुज क्षेत्र में जारी परिस्थितियों को देखते हुए वहां काम कर रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा भारत के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा रही।
प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई और उनकी सुरक्षित स्थिति सुनिश्चित करने की जरूरत पर जोर दिया। बातचीत के दौरान ट्रंप की ओर से भी भारत के साथ खड़े रहने का भरोसा दिए जाने की बात सामने आई है। इससे दोनों देशों के बीच रणनीतिक और सुरक्षा सहयोग के महत्व को भी रेखांकित किया गया।
भारत और अमेरिका के बीच व्यापार का मुद्दा भी दोनों नेताओं की बातचीत में शामिल रहा। दोनों देशों के संबंधों में व्यापार और आर्थिक सहयोग लगातार महत्वपूर्ण विषय बने हुए हैं। ऐसे में जी-7 बैठक के दौरान दोनों नेताओं की मुलाकात को कई स्तरों पर अहम माना गया।
सर्जियो गोर के बयान के बाद अब प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर भारत और अमेरिका के पक्षों में अंतर स्पष्ट दिखाई दे रहा है। अमेरिकी राजदूत ने मीडिया सवालों को लेकर भारत के अनुरोध का जिक्र किया, जबकि भारतीय पक्ष ने इसे प्रतिनिधिमंडल की पूर्व तैयारी और ट्रंप के अप्रत्याशित रवैये को ध्यान में रखकर बरती गई सावधानी से जोड़ा है। इस घटनाक्रम ने मोदी-ट्रंप मुलाकात से जुड़े राजनीतिक और कूटनीतिक पहलुओं को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।
