
नई दिल्ली ।केंद्र सरकार ने गेहूं से बने कई प्रमुख उत्पादों के निर्यात को लेकर बड़ा नीतिगत फैसला लिया है। सरकार ने गेहूं या मेस्लिन आटा, मैदा, सूजी, होलमील आटा और मिश्रित गेहूं के आटे को प्रतिबंधित निर्यात श्रेणी से हटाकर मुक्त श्रेणी में डाल दिया है। अब इन उत्पादों का निर्यात बिना पहले लगाए गए प्रतिबंधों के किया जा सकेगा।
विदेश व्यापार महानिदेशालय की ओर से सोमवार को जारी अधिसूचना में निर्यात नीति में किए गए इस बदलाव की जानकारी दी गई। इस फैसले से गेहूं आधारित उत्पादों के कारोबार से जुड़े निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में अधिक स्वतंत्रता मिलेगी और वे मांग के अनुसार इन उत्पादों की विदेशी बाजारों में आपूर्ति कर सकेंगे।
सरकार ने वर्ष 2022 में घरेलू खाद्य सुरक्षा और कीमतों को नियंत्रित करने के उद्देश्य से गेहूं तथा गेहूं से बने उत्पादों के निर्यात पर कई तरह की पाबंदियां लगाई थीं। 13 मई 2022 को गेहूं की निर्यात नीति को मुक्त श्रेणी से प्रतिबंधित श्रेणी में कर दिया गया था।
इसके बाद अगस्त 2022 में गेहूं के आटे के निर्यात पर भी प्रतिबंध लागू किया गया था। उस समय वैश्विक बाजार में गेहूं की आपूर्ति को लेकर दबाव बना हुआ था। रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित हुई थी, जिससे भारतीय गेहूं की विदेशी मांग में बढ़ोतरी हुई और घरेलू बाजार में कीमतों पर दबाव बढ़ने की आशंका बनी थी।
सरकार ने उस समय देश की बड़ी आबादी के लिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने और गेहूं तथा गेहूं के आटे की कीमतों को नियंत्रित रखने को प्राथमिकता दी थी। हालांकि, प्रतिबंधों के दौरान कुछ विशेष परिस्थितियों में गेहूं से बने चुनिंदा उत्पादों के निर्यात की अनुमति भी दी जाती रही।
अब परिस्थितियों में बदलाव के बाद सरकार ने निर्यात नीति में ढील देने का फैसला किया है। इस वर्ष फरवरी में बेहतर स्टॉक उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए सरकार ने 25 लाख मीट्रिक टन गेहूं और अतिरिक्त पांच लाख मीट्रिक टन गेहूं उत्पादों के निर्यात की अनुमति दी थी।
इस फैसले की पृष्ठभूमि में देश में गेहूं और कुल खाद्यान्न उत्पादन में बढ़ोतरी भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025-26 में भारत का कुल खाद्यान्न उत्पादन 5.3 प्रतिशत बढ़कर रिकॉर्ड 37.6563 करोड़ टन रहने का अनुमान है। वर्ष 2024-25 में यह आंकड़ा 35.7732 करोड़ टन था।
फसलवार आंकड़ों के मुताबिक 2025-26 में चावल का उत्पादन 15.4024 करोड़ टन रहने का अनुमान है। यह पिछले वर्ष के 15.0184 करोड़ टन के मुकाबले अधिक है। इसी तरह गेहूं का उत्पादन भी बढ़ने का अनुमान है।
वर्ष 2025-26 में गेहूं का उत्पादन 12.0657 करोड़ टन रहने का अनुमान है, जबकि 2024-25 में यह 11.7945 करोड़ टन था। उत्पादन में इस बढ़ोतरी और बेहतर स्टॉक उपलब्धता ने सरकार को गेहूं आधारित उत्पादों के निर्यात पर लगी पाबंदियों में बदलाव की गुंजाइश दी है।
नीति में बदलाव से आटा, मैदा और सूजी जैसे उत्पादों के निर्यात कारोबार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। साथ ही भारतीय कृषि उत्पादों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहुंच बढ़ाने का अवसर भी बनेगा। हालांकि, घरेलू बाजार में कीमतों और उपलब्धता पर सरकार की निगरानी महत्वपूर्ण बनी रहेगी।
