गांव पहुंचते ही कलेक्टर ने ग्राम पंचायत प्रांगण में चौपाल लगाई और सभी अधिकारियों को ग्रामीणों के बीच जमीन पर बैठने के निर्देश दिए। इस दौरान ग्रामीणों ने राजस्व, सड़क, पानी, आवास और आंगनवाड़ी जैसी मूलभूत समस्याएं खुलकर सामने रखीं।
चौपाल के दौरान राजस्व मामलों की समीक्षा में सीमांकन में देरी सामने आने पर कलेक्टर ने नाराजगी जताई और संबंधित नायब तहसीलदार को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। वहीं आंगनवाड़ी केंद्रों के नियमित रूप से न खुलने पर सुपरवाइजर के निलंबन और सीडीपीओ को कारण बताओ नोटिस देने की कार्रवाई के आदेश दिए गए।
ग्रामीणों द्वारा रास्ता विवाद और संकरी सड़कों की समस्या उठाए जाने पर कलेक्टर ने तत्काल समाधान और सड़क चौड़ीकरण के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने स्पष्ट कहा कि सभी विभाग गांव में शिविर लगाकर समयबद्ध तरीके से समस्याओं का निराकरण सुनिश्चित करें, ताकि लोगों को दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें।
प्रधानमंत्री आवास योजना की समीक्षा के दौरान जिन हितग्राहियों ने निर्माण कार्य शुरू नहीं किया था, उनके आवास निरस्त करने के निर्देश भी दिए गए। वहीं नल-जल योजना में लापरवाही पाए जाने पर पीएचई उपयंत्री और रोजगार सहायक को नोटिस जारी किया गया।
विद्युत विभाग को घर-घर मीटर लगाने की प्रक्रिया जल्द शुरू करने और टंट्या मामा योजना के पात्र हितग्राहियों को ऋण स्वीकृति में तेजी लाने के निर्देश दिए गए।
कलेक्टर ने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि टिकुरी गांव की समस्याएं भविष्य में फिर से जनसुनवाई में आती हैं तो संबंधित अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
यह दौरा प्रशासनिक सख्ती और जमीनी स्तर पर शासन की पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
