मां वाग्देवी की पूजा-अर्चना और अखंड ज्योति की स्थापना के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई। इसके बाद भजन संध्या, हवन और महाआरती में सैकड़ों श्रद्धालु शामिल हुए। जैसे-जैसे आयोजन आगे बढ़ा, पूरा परिसर जयकारों और मंत्रोच्चार से गूंज उठा।
श्रद्धालुओं ने घरों से पटाखे लाकर आतिशबाजी की और अपनी खुशी का इजहार किया। पूरे परिसर में दीपावली जैसा दृश्य देखने को मिला। सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस और प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा।
भोज उत्सव समिति के अनुसार, यह पहला मौका है जब हालिया निर्णय के बाद मंगलवार को “महासत्याग्रह” के रूप में बड़ा आयोजन किया गया। पहले जहां प्रति मंगलवार सत्याग्रह होता था, वहीं अब इसे “विजय महोत्सव” के रूप में मनाया जा रहा है।
कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं ने यह मांग भी उठाई कि मां वाग्देवी की मूल प्रतिमा को लंदन से वापस लाया जाए और भोजशाला में पुनः स्थापित किया जाए।
