प्रदर्शन में शामिल युवाओं और संगठन पदाधिकारियों ने कहा कि नीट यूजी जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा का प्रश्न पत्र लीक होना देश की शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। उनका आरोप था कि लगातार हो रहे पेपर लीक से मेहनती और मेधावी छात्रों का भविष्य अंधकार में जा रहा है। संगठन का कहना है कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की कमी के कारण छात्रों और अभिभावकों में अविश्वास और मानसिक तनाव लगातार बढ़ रहा है।
एमएयू कार्यकर्ताओं ने मांग उठाई कि नीट सहित सभी भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में हुए पेपर लीक मामलों की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच कराई जाए। साथ ही इसमें शामिल अधिकारियों, एजेंसियों और अन्य दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि केवल जांच की घोषणा पर्याप्त नहीं है, बल्कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए मजबूत और स्थायी व्यवस्था बनाना जरूरी है।
संगठन ने मेडिकल प्रवेश प्रक्रिया में भी बदलाव की मांग करते हुए कहा कि छात्रों को 12वीं कक्षा की मेरिट के आधार पर मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश दिया जाना चाहिए। इसके अलावा, परीक्षा संचालन की जिम्मेदारी सरकार के सीधे नियंत्रण में होनी चाहिए और एनटीए जैसी एजेंसी को समाप्त किया जाना चाहिए।
ज्ञापन में बेरोजगारी का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि मध्य प्रदेश में लाखों सरकारी पद खाली होने के बावजूद स्थायी भर्तियां नहीं की जा रही हैं। उन्होंने प्रदेश में समाप्त किए जा रहे 1.20 लाख सरकारी पदों को बहाल कर सभी विभागों में नियमित भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की मांग की। युवाओं का कहना था कि अस्थायी नियुक्तियों और आउटसोर्स व्यवस्था से रोजगार की स्थिरता खत्म हो रही है।
प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग भी की। वहीं स्थानीय छात्रों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए शिवपुरी जिले में नीट परीक्षा केंद्र स्थापित करने की मांग रखी गई, ताकि विद्यार्थियों को दूसरे शहरों में जाकर परीक्षा देने की परेशानी न उठानी पड़े।
एमएयू ने चेतावनी दी कि यदि सरकार जल्द ठोस कदम नहीं उठाती, तो आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज किया जाएगा।
