मीनाक्षी शेषाद्रि ने कहा कि कुछ कलाकार बिना ठोस काम किए केवल मीडिया में बने रहने के लिए अलग-अलग रणनीतियां अपनाते हैं, जिसमें अतरंगी स्टाइल, विवादित बयान और लगातार सुर्खियों में बने रहने की कोशिश शामिल होती है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि वह इस तरह की सोच से सहमत नहीं हैं और उनका मानना है कि कलाकार की असली पहचान उसके काम से बननी चाहिए, न कि प्रचार के तरीकों से।
उन्होंने एक पुरानी फिल्म का उदाहरण देते हुए कहा कि मनोरंजन की दुनिया में हमेशा से यह धारणा रही है कि यहां केवल वही टिकता है जो दर्शकों को कुछ वास्तविक और प्रभावशाली देता है। उनके अनुसार, अगर कोई कलाकार अपने काम पर ध्यान दे और गुणवत्ता के साथ आगे बढ़े, तो सफलता अपने आप उसके दरवाजे तक पहुंचती है। उन्होंने यह भी कहा कि मेहनत और प्रतिभा ही वह आधार है जिस पर लंबे समय तक करियर खड़ा रहता है।
अभिनेत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी पर व्यक्तिगत टिप्पणी करना नहीं है, बल्कि वह केवल उस प्रवृत्ति पर अपनी राय दे रही हैं जो आज के समय में तेजी से बढ़ती दिखाई दे रही है। उनके अनुसार, सोशल मीडिया और पीआर के बढ़ते प्रभाव ने मनोरंजन जगत में प्रतिस्पर्धा का तरीका बदल दिया है, लेकिन इससे कलाकार की वास्तविक प्रतिभा पीछे नहीं छिपनी चाहिए।
इस बीच फिल्म इंडस्ट्री में पीआर और ट्रोलिंग कल्चर को लेकर पहले भी कई कलाकार अपनी राय व्यक्त कर चुके हैं। कई लोगों का मानना है कि डिजिटल दौर में पहचान बनाने के तरीके बदल गए हैं, लेकिन कुछ कलाकार अब भी मानते हैं कि असली सफलता केवल और केवल काम के दम पर ही हासिल की जा सकती है।
मीनाक्षी शेषाद्रि के इस बयान ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या आज के दौर में लोकप्रियता का पैमाना केवल पब्लिसिटी है या फिर अब भी प्रतिभा और मेहनत ही सबसे बड़ी पहचान है।
