रावलकोट । पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) (Pakistan-occupied Kashmir (PoK) में सस्ता आटा-चावल, किफायती बिजली और बुनियादी अधिकारों की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे आम लोगों को एक बार फिर पाकिस्तानी सेना (Pakistan Army) का कहर झेलना पड़ा। रावलकोट के ईदगाह मैदान में गुरुवार को उस समय भयानक मंजर नजर आया जब सैनिकों ने बिना चेतावनी गोलियां बरसानी शुरू कर दीं, जिसमें कम से कम 16 निहत्थे प्रदर्शनकारी मारे गए और 37 अन्य घायल हो गए।
रावलकोट में आर्थिक तंगी से जूझ रहे करीब 60 से 70 हजार लोग प्रदर्शन कर रहे हैं। इसमें पुरुष, महिलाएं और युवा सभी शामिल हैं। ईदगाह मैदान में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों पर पाकिस्तानी सेना और रेंजर्स की गोलियों की बरसात से अचानक हर तरफ भगदड़ मच गई। थोड़ी ही देर में पूरे इलाके में मंजर एकदम दिल दहला देने वाला था। खून से सनी सड़कों और खेतों में अपनों को ढूंढ़ते दुखी परिवार हक की आवाज उठाने की मानवीय कीमत चुकाने की निशानी बन गए हैं। पीओके में शुक्रवार से जारी विरोध प्रदर्शनों के दौरान इस तरह की दमनकारी कार्रवाई में अब तक 53 लोगों की जान जा चुकी है। पाकिस्तानी सेना यहां जितनी दमनकारी कार्रवाई कर रही है, सड़कों पर उतरे लोगों का हौसला उससे कहीं ज्यादा बुलंद है। इस खूनी कहर के बावजूद सैकड़ों की संख्या में प्रदर्शनकारी अब भी अपनी मांगों से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।
आर-पार के मूड में जनता
गोलीबारी के बाद भीड़ को संबोधित करते हुए आंदोलन के नेता सरदार अमन खान ने कहा कि संघर्ष अब एक निर्णायक दौर में पहुंच गया है और संकल्प लिया कि जान-माल के नुकसान के बावजूद यह आंदोलन जारी रहेगा। सड़कों पर मौजूद लोग कोई हथियार नहीं लिए हैं। वे बस सस्ते भोजन, सस्ती बिजली और सम्मानजनक जीवन की मांग कर रहे हैं। फिर भी, उन्हें जवाब में गोलियां मिली हैं।
