जानकारी के अनुसार, 24 जुलाई को आयोजित एमबीएस प्रथम सेमेस्टर की परीक्षा का प्रश्नपत्र परीक्षा शुरू होने के कुछ ही मिनट बाद एक व्हाट्सएप समूह में साझा किया गया। अगले दिन इस घटना से जुड़े डिजिटल साक्ष्य सामने आने के बाद विश्वविद्यालय की परीक्षा प्रणाली और गोपनीयता व्यवस्था पर सवाल उठने लगे। छात्रों ने आरोप लगाया कि यदि परीक्षा के दौरान प्रश्नपत्र ऑनलाइन उपलब्ध था तो पूरी परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता प्रभावित हुई है।
पुलिस जांच में सामने आया कि प्रश्नपत्र प्रसारित करने के आरोप में संदीप सिंह नामक शिक्षक को गिरफ्तार किया गया है। जांच एजेंसियों के अनुसार, वह काठमांडू के दो शिक्षण संस्थानों से जुड़े हुए हैं और विद्यार्थियों के बीच एक लोकप्रिय नाम से जाने जाते हैं। पुलिस ने उनके खिलाफ परीक्षा गोपनीयता से जुड़े प्रावधानों के उल्लंघन के आरोप में मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है।
पूछताछ के दौरान आरोपी ने दावा किया कि उसने केवल किसी अन्य व्यक्ति से प्राप्त प्रश्नपत्र को संबंधित व्हाट्सएप समूह में आगे भेजा था। उसने यह भी कहा कि उसे इस घटना से कोई आर्थिक लाभ नहीं हुआ और वह केवल पहले से प्रसारित सामग्री को साझा कर रहा था। हालांकि जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि प्रश्नपत्र सबसे पहले किस स्रोत से बाहर आया और इसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क तो सक्रिय नहीं था।
मामले का खुलासा तब हुआ जब एक छात्र ने संबंधित व्हाट्सएप चैट के स्क्रीनशॉट सार्वजनिक कर दिए। जांच के दौरान सामने आए डिजिटल रिकॉर्ड में परीक्षा शुरू होने के कुछ मिनट बाद प्रश्नपत्र की पीडीएफ साझा किए जाने के साथ-साथ उसके विस्तृत उत्तर भी उपलब्ध कराए जाने के संकेत मिले। इसके बाद पुलिस ने कई लोगों से पूछताछ की। प्रारंभिक जांच में पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर कुछ लोगों को छोड़ दिया गया, जबकि मुख्य आरोपी के खिलाफ कार्रवाई जारी रखी गई।
नेपाल के शिक्षा मंत्रालय ने मामले को गंभीर मानते हुए गृह मंत्रालय और पुलिस अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित किया। मंत्रालय का कहना है कि प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि प्रश्नपत्र लीक की घटना किसी विश्वविद्यालय कर्मचारी के बजाय एक शिक्षक से जुड़ी हो सकती है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होगी।
इस घटना ने नेपाल की उच्च शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर नई बहस छेड़ दी है। हाल के वर्षों में शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता, परीक्षा सुरक्षा और युवाओं के विश्वास जैसे मुद्दे लगातार चर्चा में रहे हैं। अब छात्र संगठनों का कहना है कि केवल दोषियों की गिरफ्तारी ही पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, तकनीकी रूप से मजबूत और पारदर्शी बनाने के लिए व्यापक सुधार भी आवश्यक हैं। आने वाले दिनों में जांच की प्रगति और सरकार के अगले कदम इस मामले की दिशा तय करेंगे।
