अवधेश प्रसाद ने कहा कि सूप बोले सूप चलनी बोले जिसमें बहत्तर छेद जैसी कहावत राजभर पर सटीक बैठती है। उन्होंने कहा कि जो लोग आज सपा पर सवाल उठा रहे हैं उनकी खुद की राजनीतिक जमीन मजबूत नहीं है। उनका दावा है कि राजभर की राजनीति केवल बयानबाजी तक सीमित है और जनता के बीच उनका प्रभाव लगातार घट रहा है।
सपा नेता ने आगे कहा कि अखिलेश यादव के नेतृत्व में समाजवादी पार्टी पूरी तरह एकजुट है और किसी भी तरह की टूट या बिखराव की बात केवल भ्रम फैलाने की कोशिश है। उन्होंने कहा कि पार्टी चट्टान की तरह मजबूत है और आने वाले चुनावों में इसका असर साफ दिखाई देगा।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ नेता चुनाव नजदीक आते ही परेशान और असहज हो जाते हैं और इसी कारण उलजुलूल बयान देने लगते हैं। उनके अनुसार इन लोगों का राजनीतिक भविष्य खत्म हो चुका है और अब वे केवल सुर्खियों में बने रहने के लिए बयानबाजी कर रहे हैं।
अवधेश प्रसाद ने यह भी कहा कि कई नेताओं ने टिकट और समर्थन के नाम पर तरह तरह के वादे किए होंगे लेकिन अब वही बातें उनके लिए परेशानी का कारण बन रही हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि समाजवादी पार्टी देश की सबसे अनुशासित राजनीतिक पार्टियों में से एक है और इसमें किसी भी तरह की अंदरूनी टूट का कोई सवाल नहीं है।
इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी प्रमुख ओम प्रकाश राजभर लगातार यह दावा कर रहे हैं कि सपा में असंतोष बढ़ रहा है और कई सांसद व नेता अलग रास्ता चुन सकते हैं। इसी क्रम में उन्होंने सपा के कुछ कार्यक्रमों और नेताओं पर भी टिप्पणी की थी जिससे राजनीतिक तापमान और बढ़ गया है।
राजभर ने हाल ही में सपा सांसद सनातन पांडे को लेकर भी बयान दिया था और दावा किया था कि पार्टी के भीतर असंतोष गहरा रहा है। उन्होंने यह भी कहा था कि कुछ घटनाओं ने पार्टी के भीतर नाराजगी को और बढ़ा दिया है और आने वाले समय में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
वहीं सपा खेमे का कहना है कि ये सभी दावे केवल राजनीतिक प्रचार का हिस्सा हैं और वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग है। पार्टी नेताओं का मानना है कि विपक्षी नेता जनता का ध्यान भटकाने के लिए ऐसे बयान दे रहे हैं लेकिन इससे सपा की एकजुटता पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
इस तरह यूपी की राजनीति में बयानबाजी का दौर और तेज हो गया है और दोनों पक्षों के बीच आरोप प्रत्यारोप का सिलसिला लगातार जारी है। आने वाले दिनों में यह विवाद और भी गहराने की संभावना जताई जा रही है क्योंकि चुनावी माहौल धीरे धीरे गर्म होता जा रहा है।
