इस बीच एक्सिस माई इंडिया के प्रमुख प्रदीप गुप्ता के हालिया बयान ने राजनीतिक चर्चा को और तेज कर दिया है। उन्होंने कहा है कि जमीनी सर्वे के आधार पर प्रदेश में लोगों की योगी सरकार के कामकाज को लेकर संतुष्टि का स्तर काफी अच्छा है और फिलहाल भाजपा की स्थिति मजबूत दिखाई दे रही है।
प्रदीप गुप्ता के अनुसार, कई क्षेत्रों में सरकार के प्रति कोई बड़ा असंतोष फिलहाल नजर नहीं आता। ऐसे में मौजूदा स्थिति में भाजपा को कोई बड़ी चुनावी चुनौती स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देती।
हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में राजनीतिक परिस्थितियां बहुत तेजी से बदलती हैं, इसलिए अभी से किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
उन्होंने बहुदलीय चुनावी व्यवस्था का जिक्र करते हुए कहा कि यूपी में वोटों का बंटवारा अक्सर चुनाव परिणामों को प्रभावित करता है। अगर कई दल मैदान में हों और विपक्षी वोट विभाजित हो जाएं, तो कम प्रतिशत वोट के साथ भी कोई पार्टी बहुमत हासिल कर सकती है। उन्होंने 26% से 29% वोट शेयर के उदाहरणों का भी उल्लेख किया, जिनसे पहले भी सरकारें बनी हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि 2027 का चुनाव मुख्य रूप से भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच केंद्रित रह सकता है, जबकि अन्य दल वोट विभाजन में भूमिका निभा सकते हैं। विपक्ष की ‘PDA’ रणनीति कितनी प्रभावी होगी, यह आने वाले समय में जनता के मूड और राजनीतिक गठबंधनों पर निर्भर करेगा।
कुल मिलाकर, सर्वे रिपोर्ट के अनुसार फिलहाल भाजपा की स्थिति मजबूत मानी जा रही है, लेकिन उत्तर प्रदेश की राजनीति में अंतिम तस्वीर चुनाव से पहले के हालात ही तय करेंगे।
