जानकारी के अनुसार, सांसद इकरा हसन जब पीड़ित परिवार की बात रखने के लिए DIG कार्यालय पहुंचीं, तो वहां मौजूद प्रशासनिक स्थिति के दौरान उन्हें पुलिस थाने ले जाया गया। इसी दौरान सांसद और पुलिसकर्मियों के बीच तीखी बहस भी हुई।
इकरा हसन ने आरोप लगाया कि पीड़ित परिवार की बुजुर्ग मां के साथ कथित रूप से अभद्र व्यवहार किया गया और जब उन्होंने इसका विरोध किया तो स्थिति और तनावपूर्ण हो गई। सांसद ने कहा कि जब वह न्याय की मांग कर रही थीं, तभी उन्हें थाने ले जाकर दबाव बनाने की कोशिश की गई। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ बताया।
स्थिति उस समय और गंभीर हो गई जब सांसद के थाने पहुंचने की खबर फैलते ही सपा कार्यकर्ता महिला थाने की ओर जुटने लगे। भीड़ बढ़ने की आशंका के चलते पुलिस ने स्थिति को संभालते हुए कुछ समय बाद इकरा हसन को थाने से छोड़ दिया।
यह पूरा मामला उस घटना से जुड़ा है जिसमें 23 अप्रैल को शामली के कांधला थाना क्षेत्र में 25 वर्षीय युवक मोनू कश्यप गंभीर हालत में मिला था, जिसके पैर कटे हुए थे। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी। परिवार ने गांव के ही कुछ लोगों पर हत्या की आशंका जताई थी। इसके बाद यह मामला लगातार राजनीतिक रंग लेता जा रहा है।
अब सांसद की पुलिस से हुई बहस और थाने ले जाने की घटना ने इस मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। प्रशासन की ओर से स्थिति को लेकर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है, जबकि राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।
