जानकारी के मुताबिक शनिवार सुबह करीब 9 बजे गांव के कुछ लोग बाग में टहल रहे थे। इसी दौरान गांव के विनीत तिवारी और अनुपम कुमार की नजर एक कोबरा सांप पर पड़ी, जो अधमरी हालत में जमीन पर पड़ा था। शुरुआत में लोगों को लगा कि शायद सांप मर चुका है, क्योंकि उसमें कोई हरकत नहीं हो रही थी। धीरे-धीरे मौके पर ग्रामीणों की भीड़ जुट गई।
ग्रामीणों ने जब पाइप से उस पर पानी डाला तो अचानक कोबरा ने फन फैलाकर फुफकारना शुरू कर दिया। यह देखते ही वहां मौजूद लोग डरकर पीछे हट गए। हालांकि बाद में लोगों ने गौर किया कि कोबरा के फन के नीचे गहरा घाव था, जिसकी वजह से वह ठीक से रेंग भी नहीं पा रहा था।
सांप की हालत देखकर ग्रामीणों ने उसकी मदद करने का फैसला किया। जान का खतरा होने के बावजूद लोगों ने किसी तरह हल्दी मंगवाई और उसके घाव पर लेप लगाया। इस दौरान गांववालों ने कोबरा को चारों तरफ से घेरकर रखा ताकि वह किसी घर या भीड़भाड़ वाले इलाके में न पहुंच सके और किसी को नुकसान न हो।
करीब दो घंटे तक ग्रामीण मौके पर डटे रहे। इसी बीच वन विभाग को सूचना दी गई। सुबह लगभग 11 बजे सर्प रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची और घायल कोबरा का सुरक्षित रेस्क्यू किया। बाद में उसे रतनपुर स्थित रिजर्व फॉरेस्ट एरिया में छोड़ दिया गया।
ग्रामीण राजेंद्र तिवारी ने बताया कि सांप की हालत बेहद खराब थी, इसलिए लोगों ने उसे बचाने की कोशिश की। वहीं वन विभाग के कर्मचारी बृजेश यादव ने कहा कि ग्रामीणों की सतर्कता और सहयोग की वजह से कोबरा को सुरक्षित बचा लिया गया।
इस घटना ने एक बार फिर दिखा दिया कि इंसान और वन्यजीवों के बीच सहअस्तित्व और संवेदनशीलता कितनी जरूरी है। गांववालों की बहादुरी और इंसानियत की अब हर तरफ तारीफ हो रही है।
