नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले में पट्टे की जमीन को लेकर ग्रामीणों और प्रशासन के बीच विवाद सामने आया है। मुख्यालय से सटे डिलौरा गांव के कई ग्रामीणों ने जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई। ग्रामीणों का कहना है कि जिस जमीन पर वे पिछले लगभग 50 वर्षों से रह रहे हैं और आजीविका चला रहे हैं, उसी भूमि को लेकर उन्हें नोटिस जारी किया गया है। इससे उनके सामने बेघर होने और रोजगार छिनने का खतरा खड़ा हो गया है।
ग्रामीणों के अनुसार, गांव में करीब 57 वर्ष पहले लगभग 49 बीघा भूमि का पट्टा कई जरूरतमंद परिवारों को आवंटित किया गया था। तब से दर्जनों परिवार उसी जमीन पर मकान बनाकर रह रहे हैं और छोटे-छोटे व्यवसाय तथा अन्य कार्यों के माध्यम से अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह जमीन ही उनकी आजीविका और आश्रय का एकमात्र साधन है।
प्रभावित ग्रामीणों ने बताया कि हाल ही में प्रशासन की ओर से उन्हें नोटिस मिलने के बाद पूरे गांव में चिंता का माहौल है। उनका कहना है कि यदि उन्हें पट्टे की जमीन से हटाया गया तो उनके सामने रहने के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं बचेगी। ऐसे में उनके परिवारों का भविष्य संकट में पड़ जाएगा। इसी आशंका को लेकर बड़ी संख्या में ग्रामीण जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे और अपनी समस्याओं से अवगत कराया।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की कि वर्षों से बने मकानों और रोजगार के साधनों को प्रभावित न किया जाए। उनका कहना है कि उन्होंने लंबे समय से शांतिपूर्वक इस भूमि पर निवास किया है और इसी के आधार पर अपने परिवार का पालन-पोषण किया है। ऐसे में किसी भी प्रकार की कार्रवाई से पहले उनकी स्थिति और सामाजिक परिस्थितियों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे लोगों ने यह भी आग्रह किया कि यदि किसी प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत कार्रवाई आवश्यक हो तो पहले प्रभावित परिवारों को उचित अवसर दिया जाए और उनकी समस्याओं का समाधान निकाला जाए। उनका कहना है कि गरीब परिवारों के लिए बिना वैकल्पिक व्यवस्था के बेदखली गंभीर सामाजिक और आर्थिक संकट पैदा कर सकती है।
फिलहाल प्रशासन की ओर से इस मामले में विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं ग्रामीणों को उम्मीद है कि उनकी मांगों पर संवेदनशीलता के साथ विचार किया जाएगा और ऐसा समाधान निकाला जाएगा जिससे उनके आवास और आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। अब इस पूरे मामले में प्रशासन के अगले निर्णय पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।
