नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले में गोवंश संरक्षण और गौशालाओं की व्यवस्थाओं को प्रभावी बनाने के लिए जिला प्रशासन ने व्यापक निरीक्षण अभियान शुरू किया है। जिलाधिकारी पुलकित गर्ग के निर्देश पर नामित नोडल अधिकारियों ने जिले के विभिन्न गोआश्रय स्थलों का दौरा कर वहां उपलब्ध सुविधाओं, गोवंशों के रखरखाव और भरण-पोषण की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। प्रशासन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि संरक्षित गोवंशों को सुरक्षित वातावरण के साथ आवश्यक सुविधाएं समय पर उपलब्ध हों।
जिलाधिकारी ने सभी नोडल अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्र में स्थित गोआश्रय स्थलों का नियमित भौतिक निरीक्षण करें और वहां की व्यवस्थाओं का विस्तृत आकलन करें। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि प्रत्येक गौशाला में गोवंशों के लिए पर्याप्त चारा, स्वच्छ पेयजल और आवश्यक देखभाल की व्यवस्था उपलब्ध रहे। निरीक्षण के दौरान यदि किसी प्रकार की कमी सामने आती है तो उसे तत्काल दूर करने की कार्रवाई की जाए।
प्रशासन की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, गुरुवार को जिले के 42 नोडल अधिकारियों ने कुल 109 गोआश्रय स्थलों का निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट उपलब्ध करा दी। जिन अधिकारियों का निरीक्षण अभी शेष है, उन्हें भी निर्धारित समय सीमा के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। इन रिपोर्टों के आधार पर जिला प्रशासन आगे की आवश्यक कार्रवाई करेगा।
निरीक्षण के दौरान गौशाला संचालकों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि संरक्षित गोवंशों के स्वास्थ्य, भोजन और देखभाल में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। गोवंशों को समय पर चारा और पानी उपलब्ध कराया जाए तथा उनकी नियमित निगरानी की जाए। प्रशासन ने यह भी कहा कि खुले में विचरण कर रहे निराश्रित गोवंशों को चिन्हित कर उन्हें गोआश्रय स्थलों में सुरक्षित रखा जाए, ताकि सड़क दुर्घटनाओं और अन्य संभावित जोखिमों को कम किया जा सके।
जिला प्रशासन का मानना है कि नियमित निरीक्षण से गौशालाओं की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता आएगी और व्यवस्थाओं में सुधार सुनिश्चित होगा। इसके साथ ही गोवंश संरक्षण से जुड़ी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन भी संभव हो सकेगा। अधिकारियों को यह भी निर्देशित किया गया है कि निरीक्षण के दौरान सामने आने वाली समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर कराया जाए।
मुख्य विकास अधिकारी डी.पी. पाल ने भी गोशाला कंट्रोल रूम के माध्यम से विभिन्न गोआश्रय स्थलों का रैंडम निरीक्षण कर व्यवस्थाओं की समीक्षा की। इस दौरान उपलब्ध सूचनाओं का मिलान कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। प्रशासन का कहना है कि कंट्रोल रूम के माध्यम से लगातार निगरानी रखी जाएगी ताकि किसी भी स्तर पर लापरवाही की स्थिति उत्पन्न न हो।
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि गोवंश संरक्षण सरकार की प्राथमिक योजनाओं में शामिल है और इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए नियमित निरीक्षण, निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी। अधिकारियों और गौशाला संचालकों के समन्वय से जिले के सभी गोआश्रय स्थलों में बेहतर व्यवस्थाएं उपलब्ध कराने और निराश्रित गोवंशों को सुरक्षित संरक्षण देने के प्रयास लगातार जारी रहेंगे।
