सीहोर जिले के बड़वेली, चंदेरी, बिलकिसगंज, ढाबला, मंगरखेड़ा, पचामा, पाली, जामुनिया, रामाखेड़ी और अन्य गांवों से पहुंचे किसानों ने समाजसेवी एमएस मेवाड़ा के नेतृत्व में मुख्यालय के बाहर करीब तीन घंटे तक धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने बिजली विभाग के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कहा कि खेतों के ऊपर से गुजर रही जर्जर 11 केवी और एलटी लाइनें किसानों की जान के लिए लगातार खतरा बनी हुई हैं। उनका आरोप है कि शिकायतों के बावजूद अधिकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था सुधारने में गंभीरता नहीं दिखाई।
प्रदर्शन के दौरान किसानों ने बताया कि हाल के वर्षों में करंट की चपेट में आने से पांच किसान गंभीर हादसों का शिकार हुए। इनमें तीन किसानों की मौत हो चुकी है, जबकि दो किसानों के हाथ काटने पड़े। ग्रामीणों का कहना है कि इन हादसों ने प्रभावित परिवारों को आर्थिक और सामाजिक संकट में डाल दिया है। उनका आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई, जिससे लोगों में नाराजगी लगातार बढ़ रही है।
प्रदर्शनकारियों ने विद्युत मंडल के प्रबंध निदेशक ऋषि गर्ग को ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई करने और पीड़ित परिवारों को नियमानुसार राहत उपलब्ध कराने की मांग की। किसानों ने यह भी कहा कि वे पहले मुख्यमंत्री कार्यालय, ऊर्जा मंत्री, जिला प्रशासन और संबंधित अधिकारियों को कई बार ज्ञापन दे चुके हैं, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका। उनका कहना है कि यदि समय रहते बिजली लाइनों की मरम्मत और रखरखाव किया जाता तो कई लोगों की जान बचाई जा सकती थी।
धरने के बाद प्रबंध निदेशक ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत करते हुए मामले की जांच कराने और नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन दिया। किसानों ने हालांकि स्पष्ट किया कि केवल आश्वासन पर्याप्त नहीं होगा और यदि निर्धारित समय में कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। उनका कहना है कि प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता के साथ परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी भी दी जानी चाहिए, ताकि उनका भविष्य सुरक्षित हो सके।
इसके बाद किसान प्रतिनिधिमंडल ने मानव अधिकार आयोग और महिला आयोग को भी ज्ञापन सौंपकर मामले में हस्तक्षेप की मांग की। आयोग के अधिकारियों ने शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराने का भरोसा दिया। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई, पीड़ित परिवारों को 25 लाख रुपये का मुआवजा और अन्य मांगें पूरी नहीं हुईं तो सीहोर, भोपाल, शाजापुर और उज्जैन सहित आसपास के जिलों के किसान संयुक्त रूप से बड़ा आंदोलन शुरू करेंगे। उनका कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली ढांचे की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती।
