पुस्तकों की रिकॉर्ड बिक्री ने साबित की सफलता, कवि सम्मेलन में बिखरी काव्य रसधार
झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय पुस्तक मेले का समापन समारोह गरिमापूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। मेले में पुस्तकों की रिकॉर्ड बिक्री ने इसकी सफलता पर मुहर लगा दी।
समापन समारोह में मुख्य अतिथि अनिल श्रीवास्तव ने पुस्तकों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पढ़ने की संस्कृति समाज के बौद्धिक विकास का आधार है। विशिष्ट अतिथि पन्नालाल असर एवं डॉ. बृजलता मिश्रा ने काव्य पाठ कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम संयोजक प्रो. पुनीत बिसारिया ने समापन रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए बताया कि तीन दिनों में बड़ी संख्या में पुस्तक प्रेमियों ने मेले में सहभागिता की और रिकॉर्ड बिक्री हुई। उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड की धरती सदैव ज्ञान और साहित्य की समृद्ध परंपरा की वाहक रही है।इससे पूर्व आयोजित युवा कवि सम्मेलन में अरुण कुमार हिंगवासिया, रवि कुशवाहा, धर्मेश सारांश, शिव शुक्ला और वैभव अवस्थी ने ओजपूर्ण काव्य पाठ कर समां बांध दिया। कार्यक्रम का संचालन गौरव पटेरिया ने किया।
समारोह में शिक्षक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। आयोजकों ने सभी सहयोगियों व प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।
पत्रकारिता-साहित्य के संबंधों पर हुआ मंथन
झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में आयोजित राष्ट्रीय पुस्तक मेले के दूसरे दिन ‘पत्रकारिता और साहित्य एवं वर्तमान परिदृश्य’ विषय पर संगोष्ठी हुई, जिसमें वरिष्ठ संपादकों व पत्रकारों ने अपने अनुभव साझा किए। कार्यक्रम की शुरुआत प्रो. पुनीत बिसारिया के स्वागत उद्बोधन से हुई। संचालन डॉ. कौशल त्रिपाठी ने किया, जबकि अंत में डॉ. मोहम्मद नईम ने आभार व्यक्त किया।
