रामपुर। रामपुर स्थित मौलाना मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय के 38 भवनों को अवैध निर्माण मानते हुए रामपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) ने ध्वस्तीकरण का आदेश जारी कर दिया है। विश्वविद्यालय प्रशासन को 20 दिन के भीतर स्वयं इन भवनों को हटाने के निर्देश दिए गए हैं। निर्धारित समय सीमा में कार्रवाई नहीं होने पर आरडीए स्वयं ध्वस्तीकरण करेगा और उसका पूरा खर्च विश्वविद्यालय प्रबंधन से भू-राजस्व की तरह वसूला जाएगा।
आरडीए के उपाध्यक्ष एवं जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने बताया कि विश्वविद्यालय परिसर के निर्माण की जांच क्षेत्रीय अवर अभियंता की रिपोर्ट के आधार पर शुरू की गई थी। नोटिस जारी कर विश्वविद्यालय प्रशासन से जवाब मांगा गया था। आठ जुलाई को लिखित जवाब मिलने के बाद 15 जुलाई को व्यक्तिगत सुनवाई की गई, जिसमें विश्वविद्यालय के प्रतिनिधि, अधिवक्ता और डिप्टी रजिस्ट्रार उपस्थित हुए। सुनवाई के बाद प्राधिकरण ने 38 भवनों को बिना स्वीकृत मानचित्र के निर्मित मानते हुए ध्वस्तीकरण का आदेश पारित कर दिया।
दो भवनों की अनुमति बनी विश्वविद्यालय के लिए सबसे बड़ा सवाल
सुनवाई के दौरान विश्वविद्यालय की ओर से तर्क दिया गया कि सींगनखेड़ा गांव, जहां विश्वविद्यालय स्थित है, 27 सितंबर 2024 से पहले आरडीए के विकास क्षेत्र में शामिल नहीं था। इसलिए आरडीए से मानचित्र स्वीकृत कराने की आवश्यकता नहीं थी और निर्माण उस समय के नियमों के अनुरूप किया गया था।
हालांकि आरडीए ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। आदेश में कहा गया कि विश्वविद्यालय ने स्वयं माना है कि मेडिकल भवन और अकादमिक ब्लॉक के लिए जिला पंचायत से अनुमति ली गई थी। इससे स्पष्ट है कि प्रबंधन निर्माण के लिए सक्षम प्राधिकारी से स्वीकृति लेने की प्रक्रिया से परिचित था। ऐसे में बाकी 38 भवन बिना अनुमति बनाए जाना नियमों का उल्लंघन माना गया।
कानूनी दलीलों को भी नहीं मिली राहत
विश्वविद्यालय प्रशासन ने अपने पक्ष में मास्टर प्लान, जोनल प्लान और उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम की विभिन्न धाराओं का हवाला दिया, लेकिन आरडीए ने विस्तृत परीक्षण के बाद इन तर्कों को खारिज कर दिया। प्राधिकरण का कहना है कि निर्माण की वैधता उस समय लागू कानून और सक्षम प्राधिकारी से मिली अनुमति के आधार पर तय होती है, बाद में दी गई कानूनी व्याख्याओं के आधार पर नहीं।
आरडीए ने यह भी स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम की धारा-59 के तहत ऐसे निर्माणों पर कार्रवाई की जा सकती है, भले ही संबंधित क्षेत्र बाद में विकास प्राधिकरण की सीमा में शामिल हुआ हो।
20 दिन का समय, नहीं हटाए तो चलेगा बुलडोजर
ध्वस्तीकरण आदेश में कहा गया है कि विश्वविद्यालय प्रबंधन 20 दिनों के भीतर स्वयं अवैध निर्माण हटाकर इसकी सूचना दे। ऐसा नहीं होने पर आरडीए कार्रवाई करेगा और ध्वस्तीकरण का पूरा खर्च अधिनियम की धारा-40 के तहत भू-राजस्व की तरह वसूला जाएगा।
हाईकोर्ट जाने की राह भी आसान नहीं
विश्वविद्यालय का संचालन मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट करता है। यदि ट्रस्ट इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती देता है तो उसे तत्काल राहत मिलना आसान नहीं होगा। आरडीए पहले ही इस मामले में हाईकोर्ट में कैविएट दाखिल कर चुका है। ऐसे में किसी भी याचिका पर अदालत पहले प्राधिकरण का पक्ष भी सुनेगी।
विश्वविद्यालय के पास दूसरा विकल्प यह भी है कि वह नियमानुसार कंपाउंडिंग की प्रक्रिया पूरी कर निर्धारित शुल्क जमा कराए और निर्माण को वैध कराने का प्रयास करे।
सरकार की सख्त नीति का भी हवाला
आरडीए के आदेश में प्रदेश सरकार की अवैध निर्माणों के खिलाफ अपनाई गई सख्त नीति का भी उल्लेख किया गया है। आदेश में कहा गया है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के तहत भू-माफिया, अवैध निर्माण और नियमों के विपरीत विकसित परिसरों के खिलाफ बिना भेदभाव कार्रवाई की जा रही है। इसी नीति के तहत जौहर विश्वविद्यालय के निर्माणों की जांच और कार्रवाई आगे बढ़ाई गई है।
2,500 से अधिक छात्रों की पढ़ाई पर मंडराया संकट
ध्वस्तीकरण आदेश के बाद विश्वविद्यालय में अध्ययनरत करीब 2,500 छात्रों और उनके अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है। यहां स्नातक, स्नातकोत्तर और विभिन्न व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में दूसरे जिलों और राज्यों के विद्यार्थी भी अध्ययन कर रहे हैं।
छात्रों और अभिभावकों का कहना है कि यदि शैक्षणिक भवनों पर कार्रवाई होती है तो कक्षाएं, प्रयोगशालाएं और अन्य शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित होंगी। इससे परीक्षाओं, डिग्री वितरण और आगामी शैक्षणिक सत्र पर भी असर पड़ सकता है। उन्होंने प्रशासन से जल्द स्पष्ट दिशा-निर्देश और वैकल्पिक व्यवस्था की मांग की है।
जौहर विश्वविद्यालय एक नजर में
स्थापना वर्ष : 2006
संचालक : मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट
स्थान : रामपुर
कुल क्षेत्रफल : लगभग 300 हेक्टेयर
चांसलर : सपा नेता आजम खां
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) से मान्यता प्राप्त निजी विश्वविद्यालय
इन पाठ्यक्रमों का होता है संचालन
बीटेक, एमटेक, इंजीनियरिंग डिप्लोमा, पॉलिटेक्निक, बीसीए, एमबीए, बीबीए, एमकॉम, एमए, मास्टर ऑफ टूरिज्म एंड ट्रैवल, बीए, एलएलबी, बीए-एलएलबी, बीएससी, एमएससी, बी.फार्मा, एम.फार्मा, डी.फार्मा, बीएड तथा डिप्लोमा इन नर्सिंग सहित अनेक पाठ्यक्रम विश्वविद्यालय में संचालित किए जाते हैं।
