घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस प्रशासन फायर ब्रिगेड और बचाव दल मौके पर पहुंचा। मलबे को हटाने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। शुरुआती कार्रवाई में एक मजदूर का शव मौके से बाहर निकाला गया जबकि तीन मजदूर घायल अवस्था में मिले। सभी घायलों को तत्काल अस्पताल ले जाया गया। गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया लेकिन इलाज के दौरान दो और मजदूरों ने दम तोड़ दिया। इस तरह हादसे में मृतकों की संख्या तीन हो गई है। एक मजदूर का इलाज अभी जारी है और उसकी हालत को लेकर चिकित्सकों की निगरानी बनी हुई है।
पुलिस के मुताबिक मृतकों में एक मजदूर नेपाल का रहने वाला था जबकि दो मजदूर पश्चिम बंगाल से संबंधित थे। मृतक की पहचान नेपाल के कैलाली जिले के सिमरी निवासी करीब 40 वर्षीय शिवराम के रूप में हुई है। उनकी मौके पर ही मौत हो गई थी। अस्पताल में इलाज के दौरान पश्चिम बंगाल के कूचबिहार निवासी रफीउल और आलम ने भी दम तोड़ दिया। पश्चिम बंगाल के ही एक अन्य मजदूर दिलबार का इलाज चल रहा है। हादसे की सूचना मिलने के बाद मृतकों के परिवारों में मातम पसरा हुआ है।
घटना की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी मौके पर पहुंचे और हालात का जायजा लिया। प्रशासन ने हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि शटरिंग किस वजह से गिरी और निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा था या नहीं। निर्माण स्थल पर इस्तेमाल की जा रही सामग्री और ढांचे की मजबूती की भी जांच की जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हादसे पर दुख जताते हुए अधिकारियों को घायलों के समुचित इलाज और प्रभावित परिवारों को हरसंभव मदद उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
मृतक शिवराम के परिवार की ओर से न्याय की मांग उठाई गई है। उनकी भतीजी मनीषा के मुताबिक शिवराम कुछ दिन पहले ही काम के लिए मथुरा आए थे। परिवार का कहना है कि निर्माण स्थल पर लंबे समय से काम चल रहा था लेकिन हादसे ने उनका सब कुछ छीन लिया। परिजनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
वहीं निर्माण स्थल पर काम कर रहे अन्य मजदूरों ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि यदि सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन किया जाता तो इस तरह का हादसा शायद टाला जा सकता था। मजदूरों ने मृतकों के परिवारों के लिए 50 लाख रुपये के मुआवजे की मांग भी रखी है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
मॉल प्रबंधन की ओर से बताया गया कि हादसे के समय चार से पांच मजदूर ही मौके पर काम कर रहे थे। प्रबंधन के अनुसार छज्जे का निर्माण करते समय अचानक शटरिंग गिर गई और हादसा हो गया। हादसा किस तकनीकी कारण से हुआ इसकी जानकारी जुटाई जा रही है। फिलहाल पुलिस और प्रशासन की जांच जारी है और पोस्टमॉर्टम तथा अन्य कानूनी प्रक्रिया के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस हादसे ने एक बार फिर बड़े निर्माण प्रोजेक्ट्स में मजदूरों की सुरक्षा और निर्माण गुणवत्ता की निगरानी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
