झांसी। जिला अस्पताल में कथित तौर पर पैसे लेकर फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट तैयार किए जाने का मामला सामने आया है। जिला अस्पताल के रक्त केंद्र प्रभारी डॉ. सुशील कुमार गुप्ता ने आरोप लगाया है कि उनके नाम, फर्जी हस्ताक्षर और रजिस्ट्रेशन नंबर वाली मुहर का इस्तेमाल कर मेडिकल प्रमाणपत्र बनाए जा रहे हैं। उन्होंने मेडिकल ऑफिसर पुलिस लाइन समेत तीन कर्मचारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए जिलाधिकारी और एसएसपी से शिकायत की है। मामले को गंभीरता से लेते हुए एडी हेल्थ ने सीएमओ को जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
कोर्ट से मिले समन के बाद सामने आया मामला
डॉ. सुशील कुमार गुप्ता के मुताबिक, उन्हें अक्सर विभिन्न न्यायालयों से मेडिकल सर्टिफिकेट से जुड़े समन और दस्तावेज मिलते हैं। उनका कहना है कि वह न तो मेडिकल सर्टिफिकेट जारी करते हैं और न ही पोस्टमार्टम का काम करते हैं। उनके अनुसार यह जिम्मेदारी मेडिकल ऑफिसर पुलिस लाइन डॉ. सूर्यकांत गुप्ता की है।
कुछ समय पहले उरई जिला न्यायालय से मिले एक समन के बाद डॉ. सुशील खुद अदालत पहुंचे। वहां दस्तावेजों की जांच करने पर पता चला कि संबंधित कागजात पर डॉ. सूर्यकांत गुप्ता के हस्ताक्षर थे। डॉ. सुशील ने आरोप लगाया कि सीएमओ कार्यालय में तैनात वार्ड बॉय राकेश कुमार और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी संजय यादव भी इस कथित खेल में शामिल हैं। उन्होंने दोनों से पूछताछ कर पूरे नेटवर्क का पता लगाने की मांग की है।
कोविड काल में भी शिकायत का दावा
डॉ. सुशील कुमार का कहना है कि कोरोना महामारी के दौरान भी उन्होंने तत्कालीन सीएमओ से फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट बनाए जाने की शिकायत की थी। उनका आरोप है कि उस समय मामले को दबा दिया गया और कोई कार्रवाई नहीं हुई।
दलाली करने का भी आरोप
शिकायत में सीएमओ कार्यालय में तैनात राकेश कुमार पर जिला अस्पताल में घूमकर दलाली करने का आरोप लगाया गया है। डॉ. सुशील का दावा है कि उसका प्रभाव इतना है कि अधिकारी भी उसके खिलाफ कार्रवाई करने से बचते हैं। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
आईजीआरएस शिकायत से भी सामने आया मामला
रक्सा निवासी रामनारायण वाल्मीकि ने आईजीआरएस पर शिकायत दर्ज कर आरोप लगाया कि धर्मेंद्र कुमार के नाम फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट बनवाने के लिए सुविधा शुल्क लिया गया। शिकायतकर्ता के अनुसार धर्मेंद्र कभी गंभीर रूप से बीमार नहीं रहा, इसके बावजूद उसके नाम मेडिकल सर्टिफिकेट जारी किया गया।
एडी हेल्थ ने दिए जांच के निर्देश
एडी हेल्थ डॉ. आरके सोनी ने कहा कि किसी डॉक्टर के नाम की मुहर के साथ अलग-अलग रजिस्ट्रेशन नंबर का इस्तेमाल किया जाना गंभीर अनियमितता है। सीएमओ को पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों की पहचान करने और उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट से कैसे बचें?
– मेडिकल सर्टिफिकेट हमेशा सरकारी या अधिकृत चिकित्सक से ही बनवाएं।
– डॉक्टर का नाम, रजिस्ट्रेशन नंबर, हस्ताक्षर और अस्पताल की मुहर जरूर जांचें।
– दलाल या बिचौलिए के जरिए प्रमाणपत्र बनवाने से बचें।
– संदेह होने पर अस्पताल, सीएमओ कार्यालय या संबंधित चिकित्सा परिषद से सत्यापन कराएं।
– फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट बनवाना या उसका इस्तेमाल करना कानूनी अपराध है।
