हमीरपुर जिले: के कृषि विज्ञान केंद्र कुरारा में मंगलवार को प्राकृतिक खेती विषय पर कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों और महिला कृषकों को प्राकृतिक खेती के महत्व, उपयोगिता और व्यावहारिक तकनीकों के बारे में वैज्ञानिक जानकारी उपलब्ध कराना रहा। कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों ने खेती की ऐसी पद्धतियों पर चर्चा की, जिनसे मृदा स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा दिया जा सके।
कार्यक्रम का आयोजन जिला गंगा समिति हमीरपुर द्वारा किया गया। जिलाधिकारी के आदेश और प्रभागीय वनाधिकारी के दिशा निर्देशन में आयोजित इस कार्यशाला को नमामि गंगे से जुड़े प्रयासों के तहत प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण गतिविधि के रूप में आयोजित किया गया।
कार्यशाला में कृषि विज्ञान केंद्र कुरारा के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. राजीव कुमार सिंह सहित विभिन्न विभागों के विशेषज्ञ मौजूद रहे। वैज्ञानिक सदस्य डॉ. शालिनी, उद्यान विभाग के वैज्ञानिक डॉ. प्रशांत कुमार और पशुपालन विभाग के वैज्ञानिक डॉ. एसपीएस सोमवंशी ने भी किसानों के साथ संवाद किया।
इसके अलावा जिला कृषि अधिकारी डॉ. हरिशंकर, नमामि गंगे के जिला परियोजना अधिकारी धीरेंद्र सिंह और कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. जीके द्विवेदी समेत किसान, महिला कृषक और कृषि मित्र कार्यशाला में शामिल हुए। अलग अलग विभागों से जुड़े विशेषज्ञों की मौजूदगी से किसानों को कृषि से संबंधित विभिन्न पहलुओं की जानकारी एक ही मंच पर उपलब्ध कराई गई।
कार्यशाला में प्राकृतिक खेती की विभिन्न तकनीकों और उनके संभावित लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने किसानों को बताया कि प्राकृतिक खेती की विधियों को खेतों में किस तरह अपनाया जा सकता है और इनके प्रभावी इस्तेमाल के लिए किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है।
किसानों को केवल मौखिक जानकारी तक सीमित नहीं रखा गया। प्राकृतिक खेती से जुड़े विषयों को समझाने के लिए प्रस्तुतीकरण भी किया गया। विशेषज्ञों ने पीपीटी और प्रोजेक्टर के माध्यम से विभिन्न विषयों को समझाया, जिससे किसानों को तकनीकी जानकारी को सरल तरीके से समझने में सहायता मिली।
कार्यशाला की एक प्रमुख विशेषता व्यावहारिक प्रदर्शन भी रहा। किसानों को प्राकृतिक खेती से संबंधित विभिन्न तकनीकों का प्रयोग करके दिखाया गया। इसका उद्देश्य किसानों को केवल सैद्धांतिक जानकारी देने के बजाय खेती के दौरान इन विधियों को व्यवहार में लागू करने की प्रक्रिया समझाना था।
कार्यक्रम के दौरान किसानों और महिला कृषकों ने प्राकृतिक खेती से जुड़े विषयों पर विशेषज्ञों से सवाल किए और संवाद किया। इस दौरान खेती की तकनीकों, उनके उपयोग और कृषि क्षेत्र में टिकाऊ पद्धतियों की भूमिका को लेकर जानकारी साझा की गई।
प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के पीछे मृदा स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ कृषि व्यवस्था को मजबूत करने की आवश्यकता प्रमुख रूप से जुड़ी है। कार्यशाला में इसी दृष्टिकोण के साथ किसानों को जागरूक किया गया और उन्हें प्राकृतिक खेती की उपयोगिता समझाने का प्रयास किया गया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. जीके द्विवेदी ने किया। आयोजन में शामिल किसानों और अन्य प्रतिभागियों के लिए सूक्ष्म जलपान की व्यवस्था भी की गई। अधिकारियों और विशेषज्ञों की मौजूदगी में आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से किसानों को प्राकृतिक खेती से जुड़ी वैज्ञानिक और व्यावहारिक जानकारी उपलब्ध कराई गई।
