नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटल स्वरूप देने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है। आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत जिले में अब तक करीब 70 प्रतिशत लोगों की आभा आईडी बनाई जा चुकी है। स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य इस अभियान को आगे बढ़ाकर जिले के शत-प्रतिशत पात्र नागरिकों को डिजिटल स्वास्थ्य व्यवस्था से जोड़ना है। अधिकारियों का मानना है कि आभा आईडी के विस्तार से मरीजों के लिए स्वास्थ्य संबंधी रिकॉर्ड संभालना और जरूरत के समय उनका उपयोग करना आसान हो सकता है।
आभा आईडी को डिजिटल स्वास्थ्य व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। पांच वर्ष से अधिक उम्र के नागरिकों के लिए बनाई जा रही इस आईडी में 14 अंकों की विशिष्ट पहचान संख्या होती है। इसके माध्यम से व्यक्ति के स्वास्थ्य संबंधी रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से व्यवस्थित करने की सुविधा मिलती है। इसमें बीमारी से संबंधित जानकारी, चिकित्सकीय परामर्श, जांच रिपोर्ट और दवाओं से जुड़े विवरण जैसे रिकॉर्ड सुरक्षित तरीके से उपलब्ध कराए जा सकते हैं।
इस व्यवस्था का उद्देश्य अस्पतालों में मरीजों को बार-बार पुराने पर्चे और मेडिकल दस्तावेज लेकर पहुंचने की परेशानी को कम करना है। किसी मरीज के पिछले इलाज से जुड़ी जानकारी डिजिटल रिकॉर्ड में उपलब्ध होने पर चिकित्सकों को उसके स्वास्थ्य इतिहास को समझने में मदद मिल सकती है। इससे उपचार के दौरान आवश्यक जानकारी जुटाने में समय की बचत होने और स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक व्यवस्थित बनाने की संभावना है।
बांदा जिले में आभा आईडी बनाने का अभियान गांवों से लेकर शहरों तक चलाया जा रहा है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में आशा कार्यकर्ताओं, एएनएम तथा कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर्स को इस अभियान से जोड़ा गया है। इसके अलावा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर मरीजों का पंजीकरण करते समय आभा आईडी बनाने की प्रक्रिया को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े अधिक से अधिक लोगों को डिजिटल व्यवस्था में शामिल करना है।
बांदा शहर के आठ अस्पतालों में मरीजों के पर्चे बनाने की प्रक्रिया को आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के माध्यम से ऑनलाइन किए जाने की जानकारी दी गई है। इससे अस्पतालों में स्वास्थ्य संबंधी प्रक्रियाओं को डिजिटल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में इस व्यवस्था के और विस्तार की उम्मीद है, जिससे जिले के ज्यादा स्वास्थ्य संस्थानों और नागरिकों को इसका लाभ मिल सके।
बांदा के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. विजेंद्र सिंह ने बताया कि जिले में आभा आईडी बनाने की प्रगति लगभग 70 प्रतिशत तक पहुंच गई है। उन्होंने इसे स्वास्थ्य सेवाओं के डिजिटलीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया और कहा कि विभाग शेष लोगों को भी इस व्यवस्था से जोड़ने के लिए लगातार काम कर रहा है। लक्ष्य है कि अधिक से अधिक नागरिकों को डिजिटल स्वास्थ्य पहचान उपलब्ध कराई जाए।
स्वास्थ्य सेवाओं के डिजिटलीकरण से कागजी रिकॉर्ड पर निर्भरता कम करने, मरीजों की जानकारी को व्यवस्थित रखने और उपचार प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाने में मदद मिल सकती है। हालांकि डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड के इस्तेमाल में मरीज की सहमति और जानकारी की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण रहेगी। बांदा में 70 प्रतिशत आबादी तक आभा आईडी की पहुंच इस अभियान की प्रगति को दर्शाती है, जबकि अब विभाग के सामने शत-प्रतिशत कवरेज हासिल करने की चुनौती है।
