ग्रामीणों के अनुसार, रामजानकी मंदिर और शंकर जी मंदिर के सामने स्थित यह कुआं वर्षों पुराना था और इसका उपयोग गांव के लोग पेयजल व घरेलू कार्यों के लिए करते थे। बाद में यह कुआं जर्जर हो गया और कथित तौर पर इसे मिट्टी डालकर बंद कर दिया गया।
ग्रामीणों का आरोप है कि अब इसी सार्वजनिक भूमि पर गांव निवासी एक व्यक्ति द्वारा अवैध निर्माण कर कब्जा कर लिया गया है। साथ ही यह भी आरोप लगाया गया है कि इस कार्य में स्थानीय स्तर पर मिलीभगत भी हुई है।
इस मामले को लेकर पहले भी उपजिलाधिकारी कालपी को शिकायतें दी जा चुकी हैं। इसके बाद प्रशासनिक टीम ने मौके पर पहुंचकर पैमाइश भी की थी। ग्रामीणों का कहना है कि जांच में यह भी स्वीकार किया गया था कि वहां पहले सार्वजनिक कुआं मौजूद था, बावजूद इसके अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
फिलहाल ग्रामीणों में प्रशासन की कार्यशैली को लेकर नाराजगी है और उन्होंने जल्द से जल्द कार्रवाई की मांग की है ताकि सार्वजनिक भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया जा सके।
