घर के पास बरगद का पेड़ न हो तो क्या करें?
आजकल शहरों और हाईराइज सोसायटियों में बरगद के पेड़ आसानी से नहीं मिलते। ऐसे में महिलाएं पूजा को लेकर परेशान हो जाती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि आसपास वट वृक्ष न हो तो व्रत से एक दिन पहले बरगद की छोटी टहनी लाकर उसे गमले में स्थापित किया जा सकता है। इसके बाद उसी टहनी के पास देवी सावित्री, सत्यवान और यमराज की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित कर विधिपूर्वक पूजा की जा सकती है। मान्यता है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई पूजा का पूरा फल प्राप्त होता है।
ऐसे करें वट सावित्री पूजा
पूजा के दौरान सबसे पहले वट वृक्ष या उसकी टहनी को जल और दूध अर्पित करें। इसके बाद रोली, हल्दी, अक्षत और फूल चढ़ाएं। फिर कच्चा सूत लेकर वट वृक्ष की सात बार परिक्रमा करें और पति की लंबी आयु की कामना करें। पूजा के बाद वट सावित्री व्रत कथा सुनना भी शुभ माना जाता है।
बरगद की पूजा करते समय इस मंत्र का जाप करना शुभ माना गया है-
“मम सौभाग्यं देहि, आयुष्यम् आरोग्यं देहि मे।
पतिसुखं च देहि त्वं, वटवृक्ष नमोऽस्तु ते॥”
मान्यता है कि इस मंत्र के जाप से वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनी रहती है और अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
