गर्मी में महिला अभ्यर्थी की बिगड़ी तबीयत
धरने के दौरान तेज गर्मी के कारण एक महिला अभ्यर्थी की तबीयत अचानक बिगड़ गई। साथी अभ्यर्थियों ने मौके पर ही उसे पानी, एनर्जी ड्रिंक और दवाइयां देकर संभाला। सूचना मिलने पर एंबुलेंस भी मौके पर पहुंची, लेकिन महिला अभ्यर्थी ने अस्पताल जाने से इनकार करते हुए आंदोलन जारी रखा। इस घटना के बाद प्रदर्शनकारियों में नाराजगी और बढ़ गई। अभ्यर्थियों का कहना था कि सरकार उनकी मांगों को लगातार नजरअंदाज कर रही है।
पुलिस की चेतावनी, फिर भी नहीं हटे प्रदर्शनकारी
प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने अभ्यर्थियों को परिसर खाली करने की चेतावनी दी। इसे लेकर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच काफी देर तक बहस होती रही। कुछ समय के लिए माहौल तनावपूर्ण भी हो गया। अभ्यर्थियों का आरोप है कि वे लंबे समय से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रख रहे हैं, लेकिन अधिकारी उनसे मिलने तक को तैयार नहीं हैं।
“8-9 बार आंदोलन कर चुके, फिर भी सुनवाई नहीं”
प्रदर्शनकारियों ने बताया कि नवंबर 2025 से अब तक वे कई बार आंदोलन कर चुके हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री के नाम खून से आवेदन लिखा, भूख हड़ताल की, मुंडन कराया और विरोध में मार्कशीट तक जलाई, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। अभ्यर्थियों का कहना है कि प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी है, इसके बावजूद भर्ती में बहुत कम पद घोषित किए गए हैं।
1.15 लाख से ज्यादा पद खाली होने का दावा
प्रदर्शन कर रहे युवाओं के अनुसार स्कूल शिक्षा विभाग में करीब 2.89 लाख स्वीकृत पदों में से 1.15 लाख से अधिक पद खाली हैं। उनका दावा है कि प्रदेश के हजारों स्कूल एक या दो शिक्षकों के भरोसे संचालित हो रहे हैं, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
अभ्यर्थियों की मुख्य मांगें
वर्ग-2 भर्ती में पद संख्या बढ़ाकर 10 हजार की जाए
वर्ग-3 भर्ती में कम से कम 25 हजार पद किए जाएं
दूसरी काउंसलिंग जल्द शुरू की जाए
विशेष शिक्षकों के 3200 पदों के लिए अलग भर्ती प्रक्रिया चलाई जाए
“मांगें नहीं मानी तो आंदोलन और तेज होगा”
अभ्यर्थियों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द फैसला नहीं लिया तो आंदोलन और उग्र किया जाएगा। उनका कहना है कि यह केवल नौकरी का मुद्दा नहीं, बल्कि प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था और युवाओं के भविष्य का सवाल है।
