इस दिन की शुरुआत 1991 में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के बाद की गई थी, ताकि आतंकवाद के खिलाफ देश को एकजुट किया जा सके। तब से हर वर्ष 21 मई को यह दिवस मनाया जाता है। इस मौके पर स्कूलों, कॉलेजों, सरकारी कार्यालयों और विभिन्न संस्थानों में शपथ ग्रहण समारोह और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी दिवस पर लोगों को यह शपथ दिलाई जाती है कि वे किसी भी प्रकार की हिंसा और आतंकवाद का समर्थन नहीं करेंगे और देश की अखंडता और एकता को बनाए रखने में अपना योगदान देंगे। यह दिन समाज में भाईचारे और शांति को मजबूत करने का संदेश देता है।
आज के समय में जब दुनिया के कई हिस्सों में आतंकवाद और हिंसा की घटनाएं सामने आती हैं, ऐसे में यह दिवस और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। यह हमें याद दिलाता है कि शांति ही विकास की पहली शर्त है और बिना शांति के कोई भी देश प्रगति नहीं कर सकता।
राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी दिवस केवल एक औपचारिक दिन नहीं है, बल्कि यह एक संकल्प है कि हम सभी मिलकर आतंकवाद के खिलाफ खड़े होंगे और एक सुरक्षित, शांतिपूर्ण और मजबूत भारत के निर्माण में योगदान देंगे।
-राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी दिवस
