विवाद की शुरुआत उस सवाल को लेकर हुई जिसमें पूछा गया था कि वह स्वतंत्रता सेनानी कौन हैं जिन्हें अंग्रेजों ने सबसे कठोर सजा दी थी। इस सवाल के जवाब के तौर पर सावरकर का नाम दिया गया था। स्कूल स्तर के इस क्विज में स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े विभिन्न विषयों पर सवाल पूछे जा रहे थे लेकिन सावरकर से जुड़े सवाल के सामने आने के बाद मामला शिक्षा के दायरे से निकलकर सीधे राजनीति के केंद्र में पहुंच गया। विपक्षी माकपा और वामपंथी छात्र संगठनों ने इस पर कड़ा विरोध जताते हुए कांग्रेस सरकार पर संघ परिवार के एजेंडे के साथ खड़े होने का आरोप लगाया।
शिक्षा मंत्री की ओर से जारी बयान में यह स्पष्ट किया गया कि संबंधित क्विज सामान्य शिक्षा विभाग या समाज विज्ञान क्लब की आधिकारिक गतिविधियों का हिस्सा नहीं था। बयान में कहा गया कि विभाग ने किसी व्यक्ति को इस तरह के सवाल तैयार करने या स्वतंत्र रूप से ऐसी प्रतियोगिता आयोजित करने के लिए अधिकृत नहीं किया था। मंत्री ने पूरे मामले की जांच कराने के निर्देश देते हुए यह भी कहा कि ऐतिहासिक रूप से गलत सवाल को शामिल करने वाले व्यक्ति की सोच पक्षपातपूर्ण हो सकती है। अब जांच के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि क्विज तैयार करने और आयोजित करने की जिम्मेदारी किसकी थी और विवादित सवाल किस आधार पर शामिल किया गया।
मामले ने केरल की राजनीति में भी नया विवाद खड़ा कर दिया है। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने कांग्रेस सरकार पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि राज्य में संघ परिवार के विचारों को जगह देने की कोशिश की जा रही है। केरल के पूर्व मुख्यमंत्री और माकपा के वरिष्ठ नेता पिनराई विजयन ने यूडीएफ सरकार पर आरएसएस के साथ मिलीभगत का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सावरकर के वास्तविक इतिहास को छिपाने और उनका महिमामंडन करने की कोशिश हो रही है। विजयन ने केंद्र सरकार और संघ पर इतिहास को नए तरीके से पेश करने का प्रयास करने का आरोप लगाते हुए इस पूरे विवाद को राष्ट्रीय शिक्षा नीति से जोड़कर भी देखा।
पूर्व सामान्य शिक्षा मंत्री वी शिवनकुट्टी ने भी इस मामले को लेकर कांग्रेस सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि क्विज में सावरकर से संबंधित सवाल शामिल करना राज्य के सामान्य शिक्षा क्षेत्र के भगवाकरण और स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास को विकृत करने की कोशिश का हिस्सा है। वामपंथी छात्र संगठनों ने भी इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए सवाल उठाया कि स्कूल स्तर की प्रतियोगिता में ऐतिहासिक तथ्यों को किस तरह प्रस्तुत किया जा रहा है।
फिलहाल सरकार ने जांच के आदेश देकर विवाद को शांत करने की कोशिश की है लेकिन सावरकर से जुड़ा यह सवाल केरल में एक बड़े राजनीतिक मुद्दे का रूप ले चुका है। एक ओर माकपा इसे इतिहास और शिक्षा के भगवाकरण से जोड़ रही है तो दूसरी ओर सरकार यह पता लगाने में जुटी है कि विवादित सवाल आखिर क्विज में कैसे शामिल हुआ। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि सवाल तैयार करने के पीछे जिम्मेदार व्यक्ति या संस्था कौन थी और कार्यक्रम किस प्रक्रिया के तहत आयोजित किया गया था।
