धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि भारत में हर साल कम से कम दो करोड़ बच्चे जन्म लेते हैं। पिछले 10 वर्षों में करीब 20 करोड़ बच्चे देश में पैदा हुए हैं और इन बच्चों की अपनी आकांक्षाएं हैं। उनके मुताबिक यही युवा आने वाले समय में भारत को विश्व गुरु बनाने की दिशा में काम करेंगे। उन्होंने कहा कि पद उनके लिए कभी महत्वपूर्ण नहीं रहा। नीट विवाद के बीच उन्होंने देश और बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस्तीफा देने का फैसला किया।
प्रधान ने इससे पहले भी अपने इस्तीफे को लेकर यही तर्क दिया था। उन्होंने कहा था कि 20 जुलाई की घटना को देखते हुए और बच्चों तथा देश की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उन्होंने पद छोड़ने का फैसला किया। उनका आरोप रहा कि जेन जी के युवाओं को गुमराह करने की कोशिश की गई। अब भुवनेश्वर में छात्रों और शिक्षकों के बीच दिए गए संबोधन में उन्होंने एक बार फिर अपने इसी रुख को दोहराया।
हालांकि राष्ट्रीय स्तर पर विवाद के साथ ही धर्मेंद्र प्रधान को अपने गृह राज्य ओडिशा में भी विरोध का सामना करना पड़ रहा है। बीजू जनता दल के कार्यकर्ता उनके कई कार्यक्रमों में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। रायराखोल में एक कार्यक्रम के दौरान भी प्रधान के खिलाफ जमकर नारेबाजी हुई। विरोध के बीच प्रधान ने कहा कि वह इस तरह की नारेबाजी से परेशान नहीं हैं। उन्होंने खुद को किसान का बेटा बताते हुए कहा कि उन्हें वापस जाने के लिए कहा जाएगा तब भी वह वापस नहीं जाएंगे बल्कि लौटकर आएंगे।
धर्मेंद्र प्रधान ने अपने संबोधन में बीजू जनता दल के अध्यक्ष और ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि नवीन पटनायक युवाओं को उनके खिलाफ भड़काने की कोशिश कर रहे हैं। प्रधान ने कहा कि नवीन बाबू उन्हें ओडिशा के लोगों के लिए शर्म की बात और बुरा व्यक्ति बताते हैं लेकिन सवाल यह है कि क्या उन्होंने कभी ऐसा कोई काम किया है जिससे राज्य के लोगों को शर्मिंदगी उठानी पड़ी हो।
प्रधान ने कहा कि संभव है कि वह राज्य के लिए सम्मान न ला पा रहे हों लेकिन उन्होंने अपने काम से कभी भी ओडिशा के लोगों को शर्मिंदा नहीं किया। उन्होंने यह भी कहा कि वह भविष्य में भी ऐसा कोई काम नहीं करेंगे जिससे राज्य की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचे। इस दौरान सभा में मौजूद लोगों ने उनके सवाल के जवाब में समर्थन जताया। कार्यक्रम में बीजेडी विधायक और ओडिशा विधानसभा के उपनेता प्रसन्ना आचार्य भी मौजूद थे।
धर्मेंद्र प्रधान का यह बयान ऐसे समय में आया है जब उनके इस्तीफे को लेकर राजनीतिक बहस जारी है। एक तरफ विपक्ष और प्रदर्शनकारी छात्र नीट से जुड़े विवादों को लेकर सवाल उठा रहे हैं तो दूसरी ओर प्रधान अपने फैसले को युवाओं और देश की सुरक्षा से जोड़कर देख रहे हैं। उन्होंने साफ संकेत दिया है कि पद छोड़ने के बावजूद वह सार्वजनिक जीवन और ओडिशा की राजनीति से पीछे हटने वाले नहीं हैं। उनके बयान से यह भी स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में नीट विवाद के साथ ओडिशा की राजनीतिक लड़ाई में भी उनका मुद्दा प्रमुख बना रह सकता है।
