यह पूरा विवाद राहुल गांधी के 10 सितंबर 2024 को अमेरिका में दिए गए भाषण से जुड़ा है। अपने संबोधन में उन्होंने सिख समुदाय के बीच इस बात को लेकर चिंता का उल्लेख किया था कि क्या भारत में सिखों को पगड़ी और कड़ा पहनने की स्वतंत्रता मिलेगी और क्या वे बिना किसी परेशानी के गुरुद्वारे जा सकेंगे। उन्होंने कहा था कि ऐसी चिंताएं केवल सिख समुदाय तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सभी धर्मों से जुड़े लोगों के अधिकारों और स्वतंत्रता का सवाल हैं।
राहुल गांधी ने अपने भाषण में भारत की विविधता और संवैधानिक व्यवस्था का भी उल्लेख किया था। उन्होंने कहा था कि भारत अलग-अलग इतिहास, परंपराओं, भाषाओं, संगीत और संस्कृति से मिलकर बना संघ है। उनके अनुसार, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा में कुछ राज्यों, भाषाओं और समुदायों को दूसरों से कमतर समझने की सोच दिखाई देती है। उन्होंने तमिल, मराठी, बंगाली और मणिपुरी भाषाओं का उदाहरण देते हुए इस दृष्टिकोण पर सवाल उठाया था।
इस बयान के बाद वाराणसी निवासी नागेश्वर मिश्रा ने राहुल गांधी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने सारनाथ थाने में एफआईआर दर्ज करने की मांग की, लेकिन पुलिस ने मामला दर्ज नहीं किया। इसके बाद उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया। मजिस्ट्रेट द्वितीय ने 28 नवंबर 2024 को उनकी शिकायत खारिज कर दी थी। अदालत का कहना था कि विवादित भाषण अमेरिका में दिया गया था और मामला उसके क्षेत्राधिकार में नहीं आता।
इसके बाद नागेश्वर मिश्रा ने एमपी-एमएलए कोर्ट में निगरानी याचिका दाखिल की, जिसे 21 जुलाई 2025 को स्वीकार कर लिया गया। इस कार्रवाई को राहुल गांधी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। बाद में मामला दोबारा निचली अदालत में पहुंचा। एसीजेएम चतुर्थ वाराणसी के न्यायाधीश नीरज त्रिपाठी ने भी शिकायत खारिज कर दी थी। अदालत ने कहा था कि शिकायत में कथित घटना की तारीख और समय का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है। इसके बाद शिकायतकर्ता ने एडीजे पंचम की अदालत में फिर से निगरानी याचिका दाखिल की।
इस पूरे मामले में राहुल गांधी ने 25 अगस्त को एमपी-एमएलए कोर्ट में अपना लिखित जवाब भी प्रस्तुत किया था। उन्होंने शिकायत को राजनीति से प्रेरित बताते हुए कहा था कि उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई शुरू करने का कोई कानूनी आधार नहीं है। उन्होंने अपने जवाब में कहा था कि वह सिख समुदाय सहित सभी धर्मों और समुदायों का सम्मान करते हैं।
राहुल गांधी का तर्क था कि अमेरिका में दिया गया उनका बयान सिख समुदाय के खिलाफ नहीं, बल्कि उसके सम्मान और हितों से जुड़ा था। उन्होंने कहा था कि उनके भाषण का उद्देश्य दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में सिख समुदाय के सामने आने वाली चुनौतियों और उनके योगदान को सामने रखना था। उनके अनुसार, इस टिप्पणी से किसी समुदाय का अपमान नहीं हुआ और न ही किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का उद्देश्य था।
राहुल गांधी ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 208 का भी हवाला दिया था। उनका कहना था कि भारत के बाहर कथित रूप से किए गए अपराध की जांच या सुनवाई के लिए केंद्र सरकार की पूर्व मंजूरी आवश्यक है। ऐसे में उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग कानूनी आधार पर उचित नहीं है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट के ताजा फैसले से इस मामले में राहुल गांधी को राहत मिली है। हालांकि, इस विवाद की पृष्ठभूमि अमेरिका में दिए गए उनके भाषण और उसके बाद वाराणसी की अदालतों में चली कानूनी प्रक्रिया से जुड़ी हुई है।
