रोजाना 850 टन कचरा, 400 से अधिक गाड़ियां प्रभावित
भोपाल में घरों से कचरा एकत्र करने के लिए 400 से अधिक वाहन तैनात हैं। ये वाहन प्रतिदिन दो से तीन चक्कर लगाते हैं। शहर के 17 गार्बेज स्टेशनों से कचरे को कैप्सूल टैंकरों के माध्यम से आदमपुर छावनी स्थित निस्तारण केंद्र तक पहुंचाया जाता है। राजधानी में रोजाना लगभग 850 टन कचरा निकलता है। लेकिन 10 हजार से अधिक सफाईकर्मियों के हड़ताल में शामिल होने से कचरा संग्रहण और उसके निस्तारण का काम प्रभावित हो गया है। कई इलाकों में कचरा जमा होने से स्थानीय लोगों और व्यापारियों की परेशानी बढ़ गई है।
नगर निगम मुख्यालय पर प्रदर्शन, बातचीत से नहीं निकला समाधान
अपनी मांगों को लेकर कर्मचारियों ने भोपाल नगर निगम मुख्यालय पर प्रदर्शन किया और नारेबाजी की। इससे पहले मंगलवार को कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपने का प्रयास किया था। अधिकारियों के नहीं पहुंचने पर नाराज कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री निवास का घेराव करने की योजना बनाई, लेकिन पुलिस ने जहांगीराबाद चौराहे पर बैरिकेडिंग कर उन्हें रोक दिया।
बुधवार को यूनियन पदाधिकारियों ने नगरीय प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे से मुलाकात की, लेकिन बातचीत के बावजूद कोई समाधान नहीं निकल सका।
सरकारी दर्जा और 25 हजार रुपये वेतन की मांग
सफाईकर्मी सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने, पति या पत्नी की मृत्यु होने पर अनुकंपा नियुक्ति, न्यूनतम 25 हजार रुपये मासिक वेतन और ठेका व्यवस्था समाप्त कर स्थायी नियुक्ति की मांग कर रहे हैं। सफाई यूनियन के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
कचरे में आग, विदिशा में विधायक ने लगाई झाड़ू
कचरा नहीं उठने से कुछ इलाकों में लोगों और व्यापारियों ने उसे जलाकर नष्ट करना शुरू कर दिया है। चूना भट्टी सहित कई स्थानों पर कचरे में आग लगाने की घटनाएं सामने आई हैं। वहीं, विदिशा जिले के सिरोंज में सफाई व्यवस्था प्रभावित होने पर विधायक उमाकांत शर्मा ने बुधवार रात करीब दो घंटे तक खुद झाड़ू लगाकर सफाई की। भोपाल में नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी ने भी कर्मचारियों की मांगों और हड़ताल को लेकर शहर की व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं।
सीवर सफाई में आठ मौतों का मुद्दा उठाकर सरकार को घेरा
सफाई कर्मचारियों के आंदोलन को लेकर कांग्रेस ने प्रदेश सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि जो कर्मचारी शहरों और गांवों को स्वच्छ रखते हैं, उन्हीं की समस्याओं पर सरकार ध्यान नहीं दे रही है। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश में सीवर और ड्रेनेज लाइन की सफाई के दौरान पांच घटनाओं में आठ लोगों की मौत हुई और चार लोग घायल हुए। ये घटनाएं ग्वालियर, रीवा, सतना, इंदौर और उज्जैन में हुईं। उज्जैन में भी एक कर्मचारी की मौत और दो लोगों के गंभीर रूप से घायल होने का मामला सामने आया।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सफाईकर्मियों की सुरक्षा के लिए प्रभावी नीति नहीं बनाई गई है। मैनुअल स्कैवेंजिंग एक्ट 2013 की धारा 7 के तहत कर्मचारियों को सुरक्षा मिलनी चाहिए। सीवर सफाई के दौरान मौत होने पर 30 लाख रुपये मुआवजे का प्रावधान बताया गया, जबकि मध्य प्रदेश में दो से चार लाख रुपये तक दिए जाने का आरोप लगाया गया। कांग्रेस का कहना है कि कई मामलों में पीड़ित परिवारों को मुआवजा भी नहीं मिल पाता।
हाईकोर्ट के आदेश और आउटसोर्सिंग पर भी सवाल
कांग्रेस नेताओं ने बताया कि वर्ष 2025 में जबलपुर हाईकोर्ट ने सफाई कर्मचारियों के लिए नीति बनाने का फैसला दिया था। एक सितंबर 2026 को सरकार की ओर से डबल बेंच में दायर अपील खारिज हो गई। अदालत ने कर्मचारियों के लिए नीति बनाने और 10 साल से अधिक समय से काम कर रहे कर्मचारियों के नियमितीकरण की बात कही थी।
इसके अलावा कांग्रेस ने आउटसोर्सिंग व्यवस्था में कथित कमीशनखोरी का आरोप लगाया। दावा किया गया कि उद्यमिता विकास केंद्र के नाम पर नौकरी दिलाने के लिए लोगों से 40-50 हजार रुपये से लेकर एक लाख रुपये तक वसूले जा रहे हैं। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि इस संबंध में मिली जानकारियों को विधानसभा में उठाया जाएगा।
