नई दिल्ली । भारतीय रेलवे से जुड़ी वित्तीय आवश्यकताओं को मजबूत आधार देने वाली सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी भारतीय रेल वित्त निगम (IRFC) ने चालू वित्त वर्ष के लिए एक बड़ा और महत्वाकांक्षी विस्तार लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसके तहत कंपनी ने 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक की ऋण मंजूरी का लक्ष्य तय किया है। यह कदम न केवल कंपनी की बढ़ती वित्तीय क्षमता को दर्शाता है, बल्कि देश के बुनियादी ढांचा क्षेत्र में उसके विस्तारशील योगदान को भी रेखांकित करता है। कंपनी के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक के अनुसार, मजबूत परियोजना पाइपलाइन और लगातार बढ़ती मांग को देखते हुए यह लक्ष्य पूरी तरह व्यावहारिक और विकासोन्मुख है, जिससे रेलवे और संबंधित क्षेत्रों में निवेश की गति और तेज होगी।
IRFC ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए एक और बड़ा लक्ष्य तय करते हुए घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से लगभग 70,000 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बनाई है, जिससे कंपनी अपनी वित्तीय संरचना को और अधिक मजबूत और विविध बना सके। यह पूंजी जुटाने की रणनीति कंपनी को केवल रेलवे फाइनेंसिंग तक सीमित न रखकर एक व्यापक इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंसिंग संस्था के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
पिछले वित्तीय वर्ष में भी कंपनी ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया था, जहां उसने लगभग 72,949 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी दी थी और 35,067 करोड़ रुपये का वितरण किया था, जो उसके वार्षिक अनुमानों से अधिक रहा। इस प्रदर्शन ने यह संकेत दिया कि IRFC की वित्तीय क्षमता और परियोजना निष्पादन की गति दोनों ही मजबूत स्थिति में हैं। इसी अवधि में कंपनी का शुद्ध लाभ बढ़कर 7,009 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 7.8 प्रतिशत अधिक है। लगातार बढ़ते लाभ और मजबूत बैलेंस शीट ने कंपनी की बाजार स्थिति को और मजबूत किया है।
कंपनी की परिसंपत्तियां भी तेजी से बढ़कर 4.85 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी हैं, जबकि इसका नेटवर्थ 56,748 करोड़ रुपये के सर्वकालिक उच्च स्तर पर दर्ज किया गया है। यह वृद्धि इस बात का संकेत है कि IRFC न केवल पारंपरिक रेलवे वित्तपोषण तक सीमित है, बल्कि अब यह बिजली उत्पादन, नवीकरणीय ऊर्जा, ट्रांसमिशन और उर्वरक जैसे विविध क्षेत्रों में भी सक्रिय भूमिका निभा रही है। इस रणनीतिक विविधीकरण ने कंपनी की आय संरचना को अधिक स्थिर और मजबूत बनाने में मदद की है।
IRFC ने अब तक शून्य एनपीए की स्थिति बनाए रखी है, जो उसकी मजबूत वित्तीय अनुशासन और जोखिम प्रबंधन क्षमता को दर्शाता है। कंपनी का शुद्ध ब्याज मार्जिन भी लगातार सुधार के साथ आगे बढ़ रहा है, जिसे आने वाले समय में और बेहतर करने का लक्ष्य रखा गया है। भारतीय रेलवे द्वारा नए ऋण वितरण का उपयोग कम करने के बाद IRFC ने अपनी भूमिका को और व्यापक बनाते हुए विभिन्न इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्रों में निवेश बढ़ाया है, जिससे यह एक बहुआयामी वित्तीय संस्था के रूप में उभर रही है।
आने वाले समय में IRFC की यह विस्तार रणनीति देश के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और बड़े स्तर पर निवेश को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है, जिससे न केवल रेलवे परियोजनाओं को लाभ मिलेगा, बल्कि ऊर्जा और औद्योगिक क्षेत्रों में भी विकास की रफ्तार तेज हो सकती है।
