Dry Iron और Steam Iron के काम करने के तरीके में काफी अंतर होता है। Dry Iron में मुख्य रूप से एक हीटिंग एलिमेंट होता है जो बिजली मिलने पर गर्म होता है। यही गर्मी आयरन की प्लेट तक पहुंचती है और कपड़ों पर दबाव डालने से उनकी सिलवटें सीधी हो जाती हैं। इसका डिजाइन अपेक्षाकृत सरल होता है और इसमें पानी की जरूरत नहीं पड़ती।
वहीं Steam Iron में हीटिंग एलिमेंट के साथ पानी रखने के लिए एक छोटा टैंक भी दिया जाता है। आयरन गर्म होने के बाद पानी को गर्म करके भाप में बदलती है और यह भाप कपड़े के रेशों को नरम करने में मदद करती है। इसके कारण जिद्दी सिलवटों को हटाना कई बार आसान और तेज हो जाता है। हालांकि पानी को गर्म करके भाप बनाने के लिए अतिरिक्त ऊर्जा की जरूरत होती है।
बिजली की खपत की बात करें तो यह मुख्य रूप से आयरन की वाट क्षमता और इस्तेमाल की अवधि पर निर्भर करती है। बाजार में कई Dry Iron लगभग 750 वाट से लेकर 1000 वाट तक की क्षमता वाली मिलती हैं। दूसरी ओर Steam Iron में मॉडल के अनुसार करीब 1500 वाट से लेकर 2400 वाट या उससे अधिक की क्षमता देखने को मिल सकती है। यानी समान समय तक चलाने पर अधिक वाट वाली Steam Iron अधिक बिजली खर्च कर सकती है।
लेकिन केवल वाट देखकर यह तय करना सही नहीं होगा कि Steam Iron हमेशा बिजली के बिल को ज्यादा बढ़ाएगी। इसका कारण यह है कि Steam Iron कई कपड़ों की सिलवटों को जल्दी हटा सकती है। अगर Dry Iron से किसी कपड़े को प्रेस करने में पांच मिनट लगते हैं और Steam Iron से वही काम दो या तीन मिनट में हो जाता है तो इस्तेमाल का कुल समय कम हो सकता है। ऐसे में वास्तविक बिजली खपत केवल मशीन की क्षमता ही नहीं बल्कि इस्तेमाल के समय पर भी निर्भर करेगी।
बिजली बचाने के लिए आयरन को जरूरत से ज्यादा देर तक चालू रखने से बचना चाहिए। कपड़ों का एक साथ ढेर तैयार करके प्रेस करना बेहतर हो सकता है। इससे बार बार आयरन गर्म करने की जरूरत कम होगी। Steam Iron इस्तेमाल करते समय पानी की मात्रा और भाप की सेटिंग भी कपड़े के अनुसार रखनी चाहिए। काम खत्म होने के बाद प्लग निकाल देना भी जरूरी है।
इसलिए अगर आप Steam Iron खरीदने की सोच रहे हैं तो केवल बिजली की खपत देखकर फैसला न करें। आयरन की वाट क्षमता इस्तेमाल का समय कपड़ों की जरूरत और आपके रोजाना के उपयोग को ध्यान में रखकर मॉडल चुनना बेहतर रहेगा। सही तरीके से इस्तेमाल करने पर Steam Iron ज्यादा वाट वाली होने के बावजूद समय बचा सकती है और यही बात उसकी वास्तविक ऊर्जा खपत को प्रभावित करती है।
