नई दिल्ली ।बंबई उच्च न्यायालय में लिपिक पद के लिए आयोजित ऑनलाइन टाइपिंग परीक्षा के दौरान तकनीकी और सर्वर संबंधी गंभीर गड़बड़ियों के आरोप सामने आए हैं। परीक्षा प्रक्रिया में आई बाधाओं से आक्रोशित कई अभ्यर्थियों ने रविवार को छत्रपति संभाजीनगर में विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। अभ्यर्थियों का आरोप है कि प्रणालीगत कमियों के कारण कई उम्मीदवारों को बिना किसी गलती के अनुत्तीर्ण घोषित कर दिया गया है।
प्रदर्शन की जानकारी मिलते ही कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक और संयोजक अभिजीत दीपके प्रभावित उम्मीदवारों से मिलने सुराणा नगर स्थित परीक्षा केंद्र पहुंचे। अभ्यर्थियों का समर्थन करते हुए दीपके ने परीक्षा को नए सिरे से दोबारा आयोजित कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि जब तक प्रभावित अभ्यर्थियों की मांगें पूरी नहीं हो जातीं, वे इस संघर्ष में उनके साथ खड़े रहेंगे। दीपके ने अधिकारियों पर अभ्यर्थियों की शिकायतों की अनदेखी करने का भी आरोप लगाया।
परीक्षार्थियों के अनुसार, सुबह के सत्र में परीक्षा के दौरान कंप्यूटर स्क्रीन में पीलापन आने और कीबोर्ड द्वारा काम करना बंद कर देने जैसी गंभीर समस्याएं आईं। कई केंद्रों पर सर्वर की सुस्ती के कारण अभ्यर्थी अपना मूल्यांकन कार्य सुचारू रूप से पूरा नहीं कर सके। अभ्यर्थियों ने आशंका जताई है कि इन तकनीकी खामियों के कारण उनके भविष्य पर विपरीत असर पड़ेगा, इसलिए प्रभावित सत्र की परीक्षा दोबारा आयोजित कराई जानी चाहिए।
उच्च न्यायालय प्रशासन की ओर से जारी एक आधिकारिक संदेश में स्पष्ट किया गया है कि परीक्षा का आयोजन तय एजेंसी के माध्यम से कराया गया था। हालांकि, प्रशासन ने माना कि औरंगाबाद और कल्याण जैसे कुछ केंद्रों पर तकनीकी बाधाएं दर्ज की गई हैं। एजेंसी द्वारा संचालित इस प्रक्रिया की विस्तृत जांच की जा रही है और उचित कार्रवाई के संबंध में उम्मीदवारों को आधिकारिक रूप से सूचित किया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि उच्च न्यायालय की औरंगाबाद और नागपुर पीठ के अंतर्गत 1,300 लिपिकीय पदों के लिए यह परीक्षा तीन सत्रों में आयोजित की गई थी। इसके लिए पूरे राज्य से लगभग 13,000 उम्मीदवार पात्र पाए गए थे, जिनमें से अकेले मराठवाड़ा और विदर्भ क्षेत्र के करीब 2,900 अभ्यर्थियों ने छत्रपति संभाजीनगर के केंद्रों पर भाग लिया था। मध्य प्रदेश सहित पड़ोसी राज्यों के प्रतियोगी परीक्षा विशेषज्ञों की नजरें भी इस भर्ती मामले के आगामी प्रशासनिक घटनाक्रम पर टिकी हुई हैं।
