अब रेलवे इस रैक को महू के रास्ते पातालपानी ले जाएगा। वहां क्रेन की मदद से कोचों को ट्रैक पर उतारा जाएगा। इसके बाद कोचों को इंजन के साथ जोड़कर उनकी अलाइनमेंट और अन्य तकनीकी व्यवस्थाओं की जांच की जाएगी। इन तैयारियों के बाद रेलवे की ओर से ट्रायल रन किया जाएगा। ट्रायल के दौरान रैक की स्थिति के साथ ट्रैक संचालन व्यवस्था और सुरक्षा से जुड़े सभी मानकों को परखा जाएगा। यदि सभी व्यवस्थाएं निर्धारित मानकों के अनुरूप पाई जाती हैं तो यात्री संचालन की अनुमति दी जाएगी। रेलवे की मौजूदा तैयारी अगले सप्ताह शनिवार से हेरिटेज ट्रेन शुरू करने की है।
इस साल ट्रेन के शुरू होने में हुई देरी की मुख्य वजह रैक का मेंटेनेंस बताया जा रहा है। आमतौर पर मानसून के दौरान पातालपानी और कालाकुंड का इलाका पर्यटकों के लिए खास आकर्षण बन जाता है। बारिश के साथ यहां की प्राकृतिक खूबसूरती कई गुना बढ़ जाती है। पहाड़ों से गिरते झरने घने जंगल घुमावदार रेल ट्रैक और बादलों से घिरी घाटियां इस सफर को रोमांचक बना देती हैं। यही वजह है कि हेरिटेज ट्रेन के संचालन का इंतजार हर साल पर्यटकों को रहता है।
पिछले साल हेरिटेज ट्रेन का संचालन 26 जुलाई से शुरू होकर 16 नवंबर 2025 तक हुआ था। इस बार अगस्त का आधा महीना बीत जाने के बाद भी यात्री सेवा शुरू नहीं हो पाई। ऐसे में अब रैक के इंदौर पहुंचने के बाद उम्मीद बढ़ी है कि जल्द ही ट्रायल रन पूरा कर ट्रेन को यात्रियों के लिए शुरू किया जा सकता है। हालांकि अंतिम तारीख रेलवे की ओर से आधिकारिक घोषणा और ट्रायल के बाद ही स्पष्ट होगी।
पातालपानी-कालाकुंड रेलखंड सिर्फ पर्यटन के लिहाज से ही नहीं बल्कि इतिहास के लिहाज से भी बेहद खास है। करीब 155 साल पुराने इस रेलखंड की शुरुआत वर्ष 1870 में इंदौर रियासत के महाराजा तुकोजीराव होलकर द्वितीय की पहल से हुई थी। वर्ष 1878 तक होलकर स्टेट रेलवे के तहत इसका निर्माण पूरा हो गया था। बाद में यह रेलखंड राजपुताना-मालवा रेलवे का हिस्सा बना। समय के साथ आसपास की कई मीटरगेज रेल लाइनों को ब्रॉडगेज में बदल दिया गया लेकिन पहाड़ी और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण यह रेलखंड अपनी पुरानी पहचान के साथ सुरक्षित रहा।
रेलवे ने इस ऐतिहासिक ट्रैक को संरक्षित रखते हुए 25 दिसंबर 2018 को पहली बार हेरिटेज ट्रेन शुरू की थी। पातालपानी से कालाकुंड तक करीब 9.5 किलोमीटर का यह सफर छोटा जरूर है लेकिन रोमांच से भरपूर है। इस मार्ग में चार सुरंगें करीब 24 तीखे मोड़ छह बड़े और 35 छोटे पुल आते हैं। ट्रेन जैसे ही पहाड़ों के बीच आगे बढ़ती है एक तरफ घने जंगल और पहाड़ दिखाई देते हैं जबकि दूसरी ओर गहरी घाटियां सफर को रोमांचक बना देती हैं।
मानसून के दौरान इस पूरे रेलखंड का नजारा बेहद आकर्षक हो जाता है। पातालपानी का झरना तेज बहाव के साथ नजर आता है और चारों ओर हरियाली छा जाती है। घाटियों में तैरते बादल और घुमावदार ट्रैक यात्रियों के लिए यादगार अनुभव बनते हैं। अब मेंटेन रैक के इंदौर पहुंचने के बाद पर्यटकों की नजर रेलवे के ट्रायल रन और आधिकारिक संचालन तारीख पर टिकी है। अगर तकनीकी और सुरक्षा जांच तय मानकों के अनुसार पूरी होती है तो अगले शनिवार से पातालपानी-कालाकुंड की खूबसूरत हेरिटेज ट्रेन एक बार फिर पटरी पर दौड़ती नजर आ सकती है।
