बैठक की शुरुआत वरिष्ठ अधिकारियों के उद्घाटन सत्र से होगी। इसके बाद ब्रिक्स पर्यावरण कार्य समूह और जलवायु परिवर्तन तथा सतत विकास पर संपर्क समूह की प्राथमिकताओं पर विचार-विमर्श किया जाएगा। चर्चा का प्रमुख उद्देश्य सदस्य देशों के बीच पर्यावरण से जुड़े मुद्दों पर साझा समझ विकसित करना और सहयोग को और मजबूत करना होगा।
इस बैठक का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि मंगलवार को ब्रिक्स पर्यावरण मंत्रियों की 12वीं बैठक आयोजित की जाएगी। इसमें सदस्य देशों के पर्यावरण मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी, नीति निर्माता और संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ भाग लेंगे। दोनों बैठकों के माध्यम से पर्यावरणीय चुनौतियों पर सामूहिक दृष्टिकोण तैयार करने का प्रयास किया जाएगा।
भारत की 2026 की ब्रिक्स अध्यक्षता के लिए इस बार की व्यापक थीम ‘लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण’ रखी गई है। पर्यावरण क्षेत्र में इस थीम के तहत सदस्य देशों के बीच ऐसे क्षेत्रों पर सहयोग बढ़ाने पर जोर रहेगा, जिनका संबंध जलवायु परिवर्तन से निपटने, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास से है।
बैठक में अंतिम दस्तावेज से जुड़े संभावित परिणामों पर भी चर्चा होगी। इसके अलावा पर्यावरण से संबंधित अन्य प्राथमिक विषयों पर विचार किया जाएगा। इन चर्चाओं के जरिए ब्रिक्स देशों के बीच साझा प्रयासों को आगे बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण के लिए सामूहिक कार्रवाई को मजबूत करने की दिशा में सहमति बनाने का प्रयास किया जाएगा।
ब्रिक्स पर्यावरण कार्य समूह की स्थापना वर्ष 2015 में मॉस्को में हुई पहली ब्रिक्स पर्यावरण मंत्रियों की बैठक के दौरान की गई थी। इसका उद्देश्य सदस्य देशों को पर्यावरण से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर नियमित रूप से सहयोग करने के लिए एक मंच उपलब्ध कराना था। इसके माध्यम से देश अपने अनुभव साझा करने, प्रभावी कार्यप्रणालियों को एक-दूसरे तक पहुंचाने और संयुक्त पर्यावरणीय कार्रवाई को मजबूत करने पर काम करते रहे हैं।
वहीं जलवायु परिवर्तन और सतत विकास पर संपर्क समूह की स्थापना वर्ष 2024 में की गई थी। इसका उद्देश्य ब्रिक्स सदस्य देशों के बीच जलवायु परिवर्तन से जुड़े विषयों पर सहयोग के लिए एक व्यवस्थित ढांचा तैयार करना है। यह समूह जलवायु संबंधी प्राथमिकताओं पर संवाद और समन्वय को बढ़ावा देने की दिशा में काम करता है।
नई दिल्ली में होने वाली बैठक ऐसे समय आयोजित हो रही है जब जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास वैश्विक नीति विमर्श के प्रमुख विषय बने हुए हैं। ब्रिक्स देशों के बीच इन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने से साझा नीतिगत अनुभवों और व्यावहारिक उपायों के आदान-प्रदान को गति मिलने की उम्मीद है। बैठकों में होने वाली चर्चा आगे की सामूहिक प्राथमिकताओं और सहयोग के क्षेत्रों को निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
