मृतक डॉक्टर की पहचान अमन पटेल के रूप में हुई है, जो मूल रूप से मध्य प्रदेश के ही जबलपुर जिले के रहने वाले थे और इंदौर में रहकर अपनी मेडिकल की आगे की पढ़ाई और सेवाएं दे रहे थे। बताया जा रहा है कि हॉस्टल की पांचवीं मंजिल से नीचे गिरने के बाद डॉक्टर अमन को संभलने का मौका भी नहीं मिला और अत्यधिक चोट आने के कारण मौके पर ही उनके प्राण पखेरू उड़ गए। जैसे ही हॉस्टल के अन्य साथी डॉक्टरों और सुरक्षाकर्मियों को भारी आवाज सुनाई दी, वे तुरंत घटनास्थल की तरफ दौड़े, जहाँ डॉक्टर अमन लहूलुहान हालत में अचेत पड़े हुए थे।
घटना की गंभीरता को देखते हुए संयोगितागंज थाना पुलिस को तुरंत मामले की सूचना दी गई। पुलिस की टीम बिना वक्त गंवाए मौके पर पहुँची और स्थिति का जायजा लिया। पुलिस ने एम्बुलेंस की मदद से शव को तुरंत कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भिजवा दिया है। अचानक हुए इस हादसे की खबर जब जबलपुर में रहने वाले डॉक्टर अमन के परिजनों को दी गई, तो परिवार में कोहराम मच गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और वे इस बात पर विश्वास नहीं कर पा रहे हैं कि उनका होनहार बेटा अब इस दुनिया में नहीं रहा।
जांच अधिकारियों के मुताबिक, शुरुआती छानबीन के दौरान घटनास्थल या डॉक्टर अमन के कमरे से किसी भी प्रकार का सुसाइड नोट या पत्र बरामद नहीं हुआ है। सुसाइड नोट न मिलने के कारण पुलिस के सामने इस आत्मघाती कदम की असली वजहों का पता लगाना एक बड़ी चुनौती बन गया है। पुलिस अब डॉक्टर अमन के करीबियों, हॉस्टल के रूममेट्स और कॉलेज के अन्य साथियों से पूछताछ कर रही है ताकि यह समझा जा सके कि क्या वे पिछले कुछ दिनों से किसी मानसिक तनाव, काम के दबाव या व्यक्तिगत परेशानी से जूझ रहे थे।
फिलहाल, संयोगितागंज थाना पुलिस ने मर्ग कायम कर लिया है और मामले की हर कोण से बारीकी से तफ्तीश की जा रही है। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही कारणों और समय का पूरी तरह से खुलासा हो पाएगा। इसके साथ ही पुलिस डॉक्टर के मोबाइल फोन के कॉल डिटेल्स और सोशल मीडिया अकाउंट्स की भी तकनीकी जांच कर रही है ताकि मौत से ठीक पहले की कड़ियों को जोड़ा जा सके। इस पूरी घटना ने चिकित्सा क्षेत्र में काम करने वाले युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं
