निर्देशों के अनुसार, किसी भी गड्ढे या सड़क खामी की सूचना मिलने के बाद 48 घंटे के भीतर उसकी मरम्मत करना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही खुले मैनहोल, नालों और जलभराव वाले क्षेत्रों में मजबूत बैरिकेडिंग, रिफ्लेक्टिव टेप और पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था करनी होगी, ताकि रात के समय दुर्घटनाओं को रोका जा सके।
कमेटी ने यह भी स्पष्ट किया है कि सभी सड़क निर्माण और मरम्मत कार्य भारतीय सड़क कांग्रेस (IRC) के मानकों के अनुसार ही किए जाएं। लापरवाही बरतने वाले राज्यों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। साथ ही सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से दो महीने के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है।
निर्देशों में यह भी कहा गया है कि जिला सड़क सुरक्षा समितियां नियमित ऑडिट करें और पिछले पांच वर्षों में गड्ढों और खराब सड़कों के कारण हुए हादसों का पूरा डेटा तैयार करें। इसमें मौतों और घायलों की जानकारी भी शामिल करने को कहा गया है।
सुप्रीम कोर्ट कमेटी ने अपने पत्र में कहा है कि खराब सड़कें, बिना रोशनी वाले जलभराव क्षेत्र और खुले नाले लगातार जानलेवा हादसों का कारण बन रहे हैं, जिन्हें तुरंत सुधारा जाना जरूरी है। इससे पहले भी वर्ष 2018 में सड़क सुरक्षा सुधार को लेकर इसी तरह के निर्देश जारी किए गए थे।
