गांव में लगे अधिकांश सरकारी हैंडपंप जनवरी महीने में ही सूख चुके थे। गर्मी बढ़ने के साथ हालात और खराब हो गए हैं। पानी के लिए ग्रामीणों को दूर-दराज के खेतों में लगे ट्यूबवेलों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। कई परिवारों ने अपने खेतों से पाइपलाइन बिछाकर गांव तक पानी पहुंचाने की व्यवस्था की है।
मुंगावली गांव में कुल 889 मकान हैं और लगभग 13 सरकारी हैंडपंप लगाए गए थे, लेकिन भूजल स्तर नीचे जाने के कारण अधिकांश हैंडपंप बंद हो चुके हैं। जिन परिवारों के पास खेत या निजी बोर नहीं हैं, वे दूसरों पर निर्भर होकर किसी तरह पानी जुटा रहे हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि 1.40 करोड़ रुपए की पेयजल योजना भ्रष्टाचार और लापरवाही की भेंट चढ़ गई। योजना के तहत पानी की टंकी का निर्माण कराया गया था, लेकिन घटिया निर्माण और अधूरे काम के कारण अब तक गांव में नियमित जलापूर्ति शुरू नहीं हो सकी।
बताया जा रहा है कि पिछले छह वर्षों में दो ठेकेदार काम अधूरा छोड़कर भाग चुके हैं। गुणवत्ताहीन निर्माण और समय पर काम पूरा नहीं करने के कारण निर्माण कंपनियों अंबकेश्वर स्टील और राधिका अग्रवाल को ब्लैकलिस्ट भी किया गया था। इसके बाद लंबे समय तक योजना बंद पड़ी रही।
फिलहाल टी एंड के कंस्ट्रक्शन देवास कंपनी को काम सौंपा गया है, लेकिन गांव वालों को अभी भी पानी के लिए भटकना पड़ रहा है।
पीएचई विभाग के ईई प्रदीप कुमार सक्सेना का कहना है कि पहले के ठेकेदारों की लापरवाही के कारण योजना में देरी हुई। अब नया ठेकेदार काम कर रहा है और जल्द ही योजना पूरी कर गांव में जलापूर्ति शुरू कर दी जाएगी।
