जिला कार्यक्रम अधिकारी एवं जिला बाल संरक्षण अधिकारी बी.एल. बिश्नोई ने बताया कि पॉक्सो एक्ट की धारा 39 के अंतर्गत इन सहायक व्यक्तियों का चयन किया जाएगा। इनका मुख्य उद्देश्य यौन उत्पीड़न का शिकार हुए बच्चों को सुरक्षित, भरोसेमंद और संवेदनशील वातावरण उपलब्ध कराना होगा, ताकि वे मानसिक दबाव और भय से बाहर निकलकर न्यायिक प्रक्रिया का सामना कर सकें।
विभाग के अनुसार, कई मामलों में बच्चे और उनके परिवार कानूनी प्रक्रियाओं, पुलिस कार्रवाई और न्यायालयीन कार्यवाही को लेकर असहज महसूस करते हैं। ऐसे में सपोर्ट पर्सन बच्चों के साथ हर चरण में सहयोग करेंगे। ये सहायक व्यक्ति पीड़ित बच्चों के बयान दर्ज कराने से लेकर कोर्ट में पेशी, मानसिक परामर्श, पुनर्वास और शासकीय योजनाओं का लाभ दिलाने तक की प्रक्रिया में मार्गदर्शन देंगे।
साथ ही बच्चों और उनके परिजनों को यह भी समझाया जाएगा कि वे किस तरह कानूनी अधिकारों का उपयोग कर सकते हैं और किसी भी प्रकार के सामाजिक दबाव या डर से कैसे बाहर निकल सकते हैं। विभाग का मानना है कि इस पहल से पीड़ित बच्चों को न्याय दिलाने की प्रक्रिया अधिक आसान और मानवीय बन सकेगी।
महिला एवं बाल विकास विभाग ने स्पष्ट किया है कि आवेदन स्वयं उपस्थित होकर, पंजीकृत डाक, स्पीड पोस्ट या कोरियर के माध्यम से जिला कार्यालय में जमा किए जा सकते हैं। आवेदन की अंतिम तिथि 28 मई 2026 निर्धारित की गई है। विभाग ने पात्रता, चयन प्रक्रिया और अन्य दिशा-निर्देशों की विस्तृत जानकारी अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध कराई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पॉक्सो जैसे संवेदनशील मामलों में प्रशिक्षित और संवेदनशील सपोर्ट पर्सन की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। इससे पीड़ित बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ता है और वे न्यायिक प्रक्रिया में अधिक सहजता से भाग ले पाते हैं। विभाग की यह पहल जिले में बाल संरक्षण व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।
