कैसे काम करता है यह रोबोट?
यह फायर फाइटिंग रोबोट पूरी तरह रिमोट ऑपरेटेड है और इसे दूर से नियंत्रित किया जाता है। इसमें लगा कैमरा और डिस्प्ले सिस्टम ऑपरेटर को लाइव स्थिति दिखाता है, जिससे यह पता चलता है कि आगे क्या हो रहा है। यह एक तरह का क्रॉलर टैंक सिस्टम है, जो खराब रास्तों, मलबे और सीढ़ियों पर भी आसानी से चल सकता है।
500°C की आग में भी काम करने की क्षमता
इस रोबोट की सबसे बड़ी खासियत इसकी गर्मी सहने की क्षमता है। यह लगभग 500 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान में भी काम कर सकता है।
इसके अलावा इसमें-
थर्मल इमेजिंग कैमरा
AI आधारित ऑब्जेक्ट डिटेक्शन
हाई प्रेशर वाटर और फोम सिस्टम
मजबूत क्रॉलर ट्रैक
जैसी आधुनिक तकनीकें लगी हैं, जो इसे बेहद प्रभावी बनाती हैं।
8 से 10 घंटे तक लगातार काम
यह रोबोट एक बार चार्ज होने पर लगभग 8 से 10 घंटे तक लगातार काम कर सकता है। इसकी बैटरी सिस्टम और कूलिंग तकनीक इसे लंबे समय तक सक्रिय रहने में मदद करती है। यह फायर टैंकर से जुड़कर पानी और फोम दोनों के जरिए आग पर काबू पा सकता है।
इंदौर में इस रोबोट का इस्तेमाल कई बड़े हादसों में किया गया है, जिनमें शामिल हैं-
नवदा पंथ प्लास्टिक फैक्ट्री आग
परदेशीपुरा की आग
सिटी फॉरेस्ट क्षेत्र की घटना
पीथमपुर की बड़ी औद्योगिक आग
इन सभी मामलों में इस रोबोट ने जोखिम भरे हालात में फायरफाइटिंग में अहम भूमिका निभाई।
क्यों है यह तकनीक खास?
यह रोबोट खास तौर पर उन जगहों के लिए बनाया गया है जहां-
तेल और गैस प्लांट
केमिकल और पेट्रोकेमिकल फैक्ट्री
बड़े गोदाम और लॉजिस्टिक हब
बिजली संयंत्र और ट्रांसफॉर्मर यूनिट
जैसे हाई रिस्क क्षेत्र शामिल हैं।
यह लगभग 500 किलो तक का भार भी संभाल सकता है और भारी मलबे में भी आसानी से मूव कर सकता है।
अधिकारियों का बयान
नगर निगम कमिश्नर के अनुसार, यह रोबोट फायर टैंकर से जुड़कर काम करता है और उच्च तापमान वाले क्षेत्रों में भी लंबे समय तक आग बुझाने में सक्षम है। इससे फायरफाइटर्स की जान का जोखिम काफी कम हो जाता है।
इंदौर का यह फायर फाइटिंग रोबोट आधुनिक आपदा प्रबंधन की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। यह तकनीक न सिर्फ आग बुझाने की क्षमता बढ़ाती है, बल्कि दमकलकर्मियों की सुरक्षा को भी नए स्तर पर ले जाती है।
