टारगेट बनाम अचीवमेंट का होगा पूरा हिसाब
इस बैठक में मंत्रियों से दिसंबर 2023 से अब तक के कामकाज का पूरा लेखा-जोखा लिया जाएगा। साथ ही अगले ढाई साल के टारगेट भी पूछे जाएंगे।
हर मंत्री को यह बताना होगा कि-
कितने वादे पूरे हुए
कितने काम प्रगति पर हैं
कौन से लक्ष्य अभी अधूरे हैं
मंत्रियों से उनके प्रभार वाले जिलों में बनी विभिन्न समितियों की रिपोर्ट ली जाएगी, जिनमें शामिल हैं—
दिशा समिति
जनभागीदारी समिति
जिला स्तरीय समन्वय समिति
मॉनिटरिंग कमेटी
इन समितियों के गठन और उनकी कार्यप्रणाली की भी समीक्षा होगी।
चुनावी तैयारियों पर भी होगी चर्चा
बैठक में आगामी नगर निकाय और पंचायत चुनावों को लेकर भी चर्चा होगी। मंत्रियों से पूछा जाएगा—
मजबूत और कमजोर सीटों की स्थिति
बूथ स्तर की तैयारी
प्रत्याशी चयन की रणनीति
विपक्ष की गतिविधियों का आकलन
मंत्रियों से उनके विभागों की उपलब्धियों, चुनौतियों और नई पहलों पर भी जानकारी ली जाएगी। इसके अलावा—
विभागीय योजनाओं की प्रगति
निगम-मंडलों के साथ समन्वय
अफसरों के कामकाज पर फीडबैक
संगठन के साथ तालमेल
इन सभी बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा होगी।
राज्यमंत्रियों के कार्य विभाजन पर भी नजर
बैठक में यह भी तय किया जाएगा कि कैबिनेट मंत्री और राज्यमंत्रियों के बीच काम का बंटवारा कितना स्पष्ट है वर्तमान व्यवस्था के तहत राज्यमंत्रियों को सीमित प्रशासनिक अधिकार मिले हुए हैं, ऐसे में कार्य विभाजन की स्थिति की समीक्षा की जाएगी।
जिलों के दौरे और योजनाओं की मॉनिटरिंग
हर मंत्री को यह भी बताना होगा कि-
उन्होंने कितने जिलों का दौरा किया
कितनी समीक्षा बैठकें लीं
कौन से विकास कार्य शुरू या पूरे हुए
साथ ही मुख्यमंत्री की प्रमुख योजनाओं में उनकी भागीदारी भी परखी जाएगी।
यह बैठक सिर्फ औपचारिक समीक्षा नहीं बल्कि आने वाले चुनावी और प्रशासनिक रोडमैप का अहम हिस्सा मानी जा रही है। सरकार अब हर मंत्री के प्रदर्शन को टारगेट और रिजल्ट के आधार पर परखने की तैयारी में है।
