कंपनी के सुपरवाइजर अर्जुन गुर्जर के मुताबिक 14 अगस्त की रात टीम को शीतल नगर में एक खुले गड्ढे को बंद करने के लिए भेजा गया था। कर्मचारियों ने मौके पर पहुंचकर काम शुरू किया था। इसी दौरान पार्षद बालमुकुंद सोनी अपने कुछ साथियों के साथ वहां पहुंचे। आरोप है कि काम को लेकर पहले बहस हुई और इसके बाद कर्मचारियों के साथ गाली गलौज और मारपीट की गई।
कंपनी के कर्मचारियों का आरोप है कि विवाद के दौरान उन्हें दोबारा क्षेत्र में दिखाई नहीं देने की धमकी भी दी गई। कर्मचारियों के मुताबिक उन्हें चेतावनी दी गई कि यदि वे फिर गड्ढा खोदने या काम करने आए तो गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। कंपनी का यह भी आरोप है कि जाते समय कर्मचारियों को धमकी दी गई कि यदि अवंतिका गैस की गाड़ी दोबारा क्षेत्र में दिखाई दी तो उसे आग लगा दी जाएगी। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
सुपरवाइजर अर्जुन गुर्जर का कहना है कि घटना के दौरान पुलिस को फोन किया गया था लेकिन तत्काल मौके पर पुलिस नहीं पहुंची। बाद में विवाद में शामिल बताए जा रहे लोग वहां से चले गए। कंपनी की ओर से पुलिस को शिकायत दिए जाने की बात कही गई है। कंपनी का दावा है कि शिकायत में आरोपियों के नाम बताए गए थे लेकिन बाद में दर्ज मामले में अज्ञात लोगों का उल्लेख किया गया। इसी वजह से पुलिस की कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
कंपनी के मुताबिक मारपीट के बाद कर्मचारियों में डर का माहौल है। उनका कहना है कि यदि किसी क्षेत्र में जरूरी गैस पाइपलाइन का काम करना हो और कर्मचारियों को सुरक्षा का भरोसा नहीं मिले तो काम करना मुश्किल हो जाता है। कंपनी ने यह भी कहा है कि पाइपलाइन से जुड़ा काम केवल सामान्य खुदाई नहीं है बल्कि गैस आपूर्ति और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ा मामला है।
अवंतिका गैस का कहना है कि संबंधित पाइपलाइन कार्य के लिए उसके पास नगर निगम की अनुमति है। कंपनी के अनुसार बारिश के मौसम में कुछ स्थानों पर पाइपलाइन में लीकेज की आशंका को देखते हुए जरूरी काम किया जा रहा है। प्रभावित हिस्से में नई तकनीक के माध्यम से वैकल्पिक व्यवस्था तैयार करने की कोशिश भी की जा रही है ताकि उपभोक्ताओं को गैस सप्लाई में परेशानी न हो और किसी संभावित दुर्घटना को रोका जा सके।
वहीं पार्षद बालमुकुंद सोनी ने कंपनी के आरोपों से इनकार करते हुए पूरे विवाद की अलग तस्वीर पेश की है। उनका कहना है कि करीब 15 दिन पहले रेडिसन होटल के पास अवंतिका गैस कंपनी खुदाई कर रही थी। उन्होंने वहां से नर्मदा पाइपलाइन गुजरने की जानकारी कर्मचारियों को दी थी और खुदाई से मना किया था। पार्षद के मुताबिक इसके बावजूद खुदाई के कारण नर्मदा पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो गई जिसके चलते करीब 700 परिवारों को दो दिन तक पानी की परेशानी हुई। उनका दावा है कि प्रभावित परिवारों के लिए उन्होंने टैंकरों से पानी उपलब्ध कराया।
सोनी के मुताबिक 14 अगस्त की रात उन्हें क्षेत्र में कंपनी के लोगों के पहुंचने की जानकारी मिली थी। उन्होंने पुलिस को सूचना देने के साथ कर्मचारियों को समझाने की कोशिश की कि वहां काम न किया जाए। उनका कहना है कि बाद में वरिष्ठ कार्यकर्ताओं से चर्चा के बाद भी काम रोकने की सलाह दी गई। पार्षद का साफ कहना है कि उन्होंने या उनके साथियों ने किसी कर्मचारी के साथ मारपीट नहीं की।
इस पूरे विवाद के बीच 23 जून को इंदौर में अवंतिका गैस की पाइपलाइन में हुए विस्फोट की घटना भी चर्चा में है। मंगल मॉल के पीछे जैन मंदिर के पास ड्रिलिंग के दौरान गैस पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने के बाद धमाका हुआ था। इस घटना में कई लोग प्रभावित हुए थे। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक इस घटना ने गैस पाइपलाइन के आसपास खुदाई और सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए थे।
अब शीतल नगर का विवाद केवल मारपीट के आरोपों तक सीमित नहीं रह गया है। पुलिस के सामने यह स्पष्ट करने की चुनौती है कि घटना के दौरान वास्तव में क्या हुआ था। क्या कर्मचारियों के साथ मारपीट हुई थी या काम रोकने को लेकर विवाद बढ़ा था। क्या कर्मचारियों को धमकी दी गई और क्या संबंधित काम के लिए कंपनी के पास आवश्यक अनुमति थी। इन सभी सवालों का जवाब पुलिस जांच और उपलब्ध साक्ष्यों से सामने आएगा।
कंपनी और पार्षद दोनों पक्षों के अलग अलग दावे सामने आने के बाद मामले में निष्पक्ष जांच महत्वपूर्ण हो गई है। यदि मारपीट और धमकी के आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई हो सकती है। वहीं यदि विवाद की वजह पाइपलाइन या खुदाई से जुड़ी कोई वास्तविक समस्या थी तो उस पहलू की भी जांच जरूरी होगी। फिलहाल पुलिस की जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
